पराली प्रबंधन व जागरूकता के लिए प्रचार वाहन रवाना, अवशेष जलाने पर लगेगा भारी जुर्माना
सिद्धार्थनगर। जनपद में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम लगाने तथा किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और उचित प्रबंधन के लाभों से अवगत कराएगा। प्रचार वाहन के माध्यम से किसानों को बताया जाएगा कि खेतों में पराली जलाने से पर्यावरण गंभीर रूप से प्रदूषित होता है। इसका सीधा प्रतिकूल असर मानव स्वास्थ्य, भूमि की उर्वरा शक्ति तथा मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर पड़ता है। इसके अलावा, खेतों में आग लगाने से आसपास खड़ी अन्य फसलों व संपत्तियों के जलने का खतरा भी बना रहता है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे फसल अवशेष को जलाने के बजाय कृषि यंत्रों की सहायता से खेत में ही मिलाएं अथवा मल्चिंग, पशुचारा और कंपोस्ट/जैविक खाद बनाने जैसे उपयोगी कार्यों में इसका समुचित उपयोग करें।
प्रचार अभियान के तहत किसानों को कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अधिनियम की धारा 24 व 26 के तहत खेतों में पराली जलाना एक दंडनीय अपराध है। पराली जलाने की घटना पाए जाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में कड़े जुर्माने का प्रावधान है, जिसके तहत 2 एकड़ से कम भूमि पर 5,000 रुपये प्रति घटना, 2 से 5 एकड़ तक 10,000 रुपये प्रति घटना और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 30,000 रुपये प्रति घटना का अर्थदंड लगाया जाएगा। पराली जलाने की पुनरावृत्ति होने पर पुनः जुर्माना लगाने के साथ ही संबंधित कृषक को कृषि विभाग की समस्त कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित कर दिया जाएगा। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक राजेश कुमार सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।