अनिवार्य सैन्य सेवा को लेकर गहराया विवाद;
प्रातःकाल एक्सप्रेस। इसराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा को लेकर अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय और प्रशासन के बीच टकराव ने सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों को सामने ला दिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य सेवा में शामिल नहीं होने वाले एक हरेदी युवक की गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों में झड़प हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को ‘नाज़ी’ कहकर विरोध जताया।
यह घटनाक्रम यरूशलम और तेल अवीव के बीच स्थित मोदिइन शहर का बताया गया है। सैन्य पुलिस युवक को गिरफ्तार करने पहुंची थी, तभी बड़ी संख्या में अति-रूढ़िवादी यहूदी उसके विरोध में जुट गए। विवाद केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल हैं।
धार्मिक अध्ययन के लिए छूट की मांग
हरेदी समुदाय के अनेक युवा पारंपरिक धार्मिक शिक्षण संस्थानों, जिन्हें ‘येशिवा’ कहा जाता है, में अध्ययन करते हैं। इन छात्रों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट लंबे समय से विवाद का विषय रही है।
समुदाय के धार्मिक नेताओं का तर्क है कि पूर्णकालिक धार्मिक अध्ययन उनकी परंपराओं और सामुदायिक पहचान को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्हें आशंका है कि सेना का वातावरण युवाओं को उनकी धार्मिक जीवनशैली से दूर कर सकता है। हालांकि, समुदाय के भीतर सभी लोगों की राय और सैन्य सेवा में भागीदारी एक जैसी नहीं है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी में बराबर हिस्सेदारी का सवाल
दूसरी ओर, छूट का विरोध करने वालों का कहना है कि देश की रक्षा का दायित्व सभी नागरिकों को साझा करना चाहिए। सात अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद बढ़ी सैन्य जरूरतों और लंबे समय तक ड्यूटी निभाने वाले सैनिकों तथा रिजर्व सैनिकों पर पड़े दबाव ने इस बहस को और तीखा किया है।
उनका सवाल है कि जब दूसरे परिवारों के युवा सैन्य सेवा दे रहे हैं, तो धार्मिक अध्ययन के आधार पर व्यापक छूट को किस सीमा तक उचित माना जा सकता है।
रोजगार और सरकारी सहायता पर भी बहस
हरेदी समुदाय से जुड़े मतभेद सैन्य भर्ती तक सीमित नहीं हैं। धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी सहायता और रोजगार में भागीदारी भी सार्वजनिक बहस के मुद्दे हैं। आलोचक आर्थिक जिम्मेदारियों में अधिक योगदान की मांग करते हैं, जबकि समुदाय के प्रतिनिधि अपनी धार्मिक शिक्षा और जीवनशैली की सुरक्षा पर जोर देते हैं।
राजनीतिक समीकरणों पर असर
यह विवाद इसराइल की गठबंधन राजनीति के लिए भी संवेदनशील है। हरेदी पार्टियां प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की राजनीतिक सहयोगी रही हैं। ऐसे में सैन्य भर्ती के नियमों पर कोई भी फैसला धार्मिक दलों की मांगों और समान जिम्मेदारी की अपेक्षा रखने वाले नागरिकों के बीच संतुलन की चुनौती खड़ी करता है।
मोदिइन का विरोध इसी व्यापक खींचतान की एक तस्वीर है। सवाल अब केवल सैन्य सेवा से छूट का नहीं, बल्कि यह भी है कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का बंटवारा कैसे हो।