राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका आसिया फारूकी बनीं जिले की प्रेरणास्रोत
सीमित संसाधनों और अकेली शिक्षिका होने के बावजूद नवाचार व सामुदायिक सहयोग से बदली विद्यालय की तस्वीर
FATEHPUR NEWS: (शीबू खान) शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका आसिया फारूकी का नाम उन शिक्षकों में सम्मान के साथ लिया जाता है, जिन्होंने विद्यालयी शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे बच्चों के सर्वांगीण विकास और समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बनाया। आसिया फारूकी ने अपने अथक प्रयासों से यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और शिक्षा के प्रति समर्पण हो तो सीमित संसाधनों के बीच भी बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने विद्यालय को एक नई पहचान दिलाई और “जंगल में मंगल” करके दिखाया। उन्होंने बच्चों में नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों को शिक्षण व्यवस्था से जोड़ा। उनके प्रयासों का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक के रूप में तैयार करना भी रहा है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आसिया फारूकी विशेष रूप से प्रयासरत रहती हैं। वह हर वर्ष बालिकाओं को आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित करती हैं और अपने निजी संसाधनों से छात्राओं को साइकिल उपहार में देती हैं, ताकि दूरी और संसाधनों की कमी उनकी शिक्षा के मार्ग में बाधा न बन सके। सीमित संसाधनों और अकेली शिक्षिका होने के बावजूद आसिया फारूकी ने नवाचार और समुदाय के सहयोग से अपने विद्यालय की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। आज उनका विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और नवाचारों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार, 2021 में मिशन शक्ति पुरस्कार तथा 2023 में राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आसिया फारूकी जैसी शिक्षिकाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका संघर्ष और समर्पण यह संदेश देता है कि एक शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाता ही नहीं, बल्कि अपने प्रयासों से पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संवार सकता है।







