शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता युवाओं के सबसे बड़े मुद्दे
FATEHPUR NEWS: अखिल भारतीय असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश कोऑर्डिनेटर मिस्बाहुल हक ने कहा कि “बुनियादी सुविधा ही न्याय है।” उन्होंने कहा कि देश के छात्रों और युवाओं से जुड़े सवाल अब शिक्षा के मंदिरों से निकलकर सामाजिक न्याय और अधिकारों की बड़ी आवाज बन चुके हैं। मिस्बाहुल हक ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में संसाधनों और शिक्षकों की कमी, आधुनिक प्रयोगशालाओं का अभाव, जर्जर भवनों की मरम्मत, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक और उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक सहायता जैसे मुद्दे युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। इन समस्याओं का समाधान किए बिना युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा अभियान अब आंदोलन का रूप ले रहा है। इससे सत्ता जवाबदेही के सवालों के घेरे में आ रही है और जनता की उम्मीदें भी इस आवाज से जुड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि साहिल लोचब प्रकरण संसद से निकलकर लोकतंत्र के तीनों स्तंभों और मीडिया के बीच मौलिक अधिकारों तथा जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। हक ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव युवाओं के भविष्य, रोजगार और अधिकारों के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। कांग्रेस युवाओं को केवल वोट की ताकत के रूप में नहीं, बल्कि देश निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति मानती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में शिक्षा के अवसरों के विस्तार, अधिकार आधारित शासन व्यवस्था, उच्च शिक्षा के विस्तार, युवा कौशल विकास और सस्ती शिक्षा की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए थे, लेकिन वर्तमान समय में इन व्यवस्थाओं में गिरावट देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक प्रासंगिकता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब लोगों को त्वरित न्याय और प्रभावी कानूनी संरक्षण भी मिले। युवाओं को सुरक्षित और समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और न्याय को एक साथ मजबूत करना जरूरी है।







