Home उत्तर प्रदेश किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम डीएम...

किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम डीएम को सौंपा 16 सूत्रीय ज्ञापन

एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल, कर्ज माफी और मुफ्त बिजली समेत कई मांगें उठाईं

FATEHPUR NEWS: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिलाध्यक्ष नवल पटेल के नेतृत्व में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित 16 सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में भारतीय किसान यूनियन ने मांग की कि सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए तथा सरकारी खरीद के लिए कानून बनाया जाए। संगठन ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य पूरे देश में न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने और किसानों के सभी लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित तत्काल कराने की मांग भी उठाई। भाकियू ने किसानों एवं कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण ऋण माफी योजना लागू करने तथा भविष्य में ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही कृषि कार्य के लिए निःशुल्क बिजली तथा सभी ग्रामीण एवं घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, बिजली बिल-2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की गई। ज्ञापन में किसानों और मजदूरों के हितों के विरुद्ध बताए गए चारों श्रम संहिताओं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति तथा राष्ट्रीय सहकारिता नीति को वापस लेने की भी मांग की गई। इसके अलावा मनरेगा के तहत 200 दिनों का रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। संगठन ने डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, सब्सिडी बहाल करने तथा कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, भूस्खलन एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों, बटाईदारों और कृषि मजदूरों को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई। भारतीय किसान यूनियन ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की व्यापक समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग की। साथ ही भूमि अधिग्रहण, बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई किसानों एवं ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास के बिना न किए जाने तथा भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 का सख्ती से पालन कराने की मांग भी की गई। ज्ञापन में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया गया, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी, एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद और ग्रामीण रोजगार प्रभावित होने की आशंका हो। संगठन ने विदेशी दुग्ध उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाने, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीज क्षेत्र में बढ़ते एकाधिकार को रोकने तथा किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों की रक्षा करने की मांग भी की। इसके अलावा कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार सृजित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। जिलाध्यक्ष नवल पटेल ने कहा कि भारतीय कृषि केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के हित में शीघ्र ठोस निर्णय लेने की अपील की। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेंद्र सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक उत्तम, देवनारायण पटेल, मुन्ना शेख, दिनेश शुक्ला, सुरेंद्र पटेल, नागेंद्र यादव, गिरजा शंकर मिश्र, विवेक यादव, जितेंद्र पटेल, हीरालाल, अशोक, अजीत उत्तम, भानु, यदुनंदन आर्य, रिहाना परवीन, अंजना देवी, शोभा, सोनिया, अर्जुन लोधी, कामता निषाद, शिवप्रसाद, वीरू, अवनीश सरोज, रूपा देवी, शिवकांति, कन्हैयालाल, राजेश कुमारी, महेश फौजी, धर्म सिंह चौहान, रामबाबू, पप्पू यादव, रामशंकर पाल सहित सैकड़ों किसान एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।