पेरई विद्यालय में ‘स्वयं करके सीखना’ पहल के तहत कक्षा छह और सात के विद्यार्थियों को ब्लॉक आधारित प्रोग्रामिंग का प्रशिक्षण, तार्किक सोच और रचनात्मकता विकसित करने पर जोर
KAUSHAMBI NEWS: बदलते डिजिटल युग में विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़ने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में उच्च प्राथमिक विद्यालय पेरई, विकासखंड नेवादा में “स्वयं करके सीखना” पहल के तहत ब्लॉक आधारित कोडिंग का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में कक्षा छह व सात के विद्यार्थियों को स्क्रैच प्रोग्रामिंग के माध्यम से कंप्यूटर को सरल भाषा में निर्देश देना, एनिमेशन तैयार करना व रचनात्मक प्रोजेक्ट बनाना सिखाया गया। विद्यालय के आईसीटी शिक्षक हरिओम सिंह ने छात्रों को बताया कि स्क्रैच एक ऐसी विजुअल प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसमें रंग-बिरंगे ब्लॉकों को जोड़कर बिना कठिन कोड लिखे विभिन्न प्रकार के प्रोग्राम, गेम, कहानियां, क्विज और एनिमेशन तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने बच्चों को ब्लॉकों का सही प्रयोग, क्रमवार निर्देश , लूप, इवेंट, मोशन, साउंड, कंट्रोल व विभिन्न कमांड के उपयोग की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें स्वयं कंप्यूटर पर कार्य करने का अवसर दिया गया। बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग करते हुए एनिमेटेड कैरेक्टर तैयार किए, संवाद जोड़े, चित्रों को गति दी और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बनाकर अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षक ने प्रत्येक छात्र व छात्रा का मार्गदर्शन करते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। आईसीटी शिक्षक ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप छात्रों में प्रारंभिक स्तर से ही कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, तार्किक विश्लेषण, समस्या समाधान क्षमता व रचनात्मक सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है। स्क्रैच प्रोग्रामिंग के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में कोडिंग सीखते हैं, जिससे उनमें तकनीक के प्रति रुचि बढ़ती है और भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऐप डेवलपमेंट व अन्य डिजिटल तकनीकों को समझने की मजबूत नींव तैयार होती है।
स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका सत्यवती देवी ने कहा कि विद्यालय में शिक्षण को रोचक और गतिविधि आधारित बनाने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। आईसीटी शिक्षक द्वारा बच्चों को व्यवहारिक तरीके से सीखने के अवसर दिए जा रहे हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास, नवाचार की भावना, सहयोगात्मक कार्यशैली और डिजिटल साक्षरता का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीकी शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है और ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर एवं भविष्य के लिए सक्षम बनाएंगे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने स्वयं बनाए गए एनिमेशन और प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए व भविष्य में और अधिक उन्नत तकनीकों को सीखने की इच्छा भी व्यक्त की। विद्यालय परिवार ने इस पहल को छात्रों के डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।







