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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखा सड़क हादसे में मृत युवक के परिजनों को मुआवजा, अपील खारिज

PRAYAGRAJ NEWS:  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सड़क हादसा मामले पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की अपील खारिज करते हुए मोटर दुर्घटना दावा, मृतक के परिजनों को दिए गए मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार की एकलपीठ ने अधिवक्ता दीपक जोशी को सुनकर दिया है। यह मामला यूपीएसआरटीसी ने गाजियाबाद स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 12 सितंबर 2012 के निर्णय और 26 सितंबर 2012 की आदेश को चुनौती दी गईं थी। अधिकरण ने मृतक के आश्रितों को ₹14,45,112 का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। 26 जून 2010 को लगभग 24 वर्षीय मिंटेश पिकअप वाहन में सवार थे। इसी दौरान यूपी रोडवेज बस से उनकी टक्कर हो गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी श्रीमती रविता सहित परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे की याचिका दाखिल की थी। कोर्ट मे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओ नें अपनी अपनी दलीलें कोर्ट मे दीं। यूपीएसआरटीसी की ओर से दलीले दी गई कि दुर्घटना रोडवेज बस चालक की नहीं, बल्कि पिकअप चालक की लापरवाही से हुई थी। निगम ने बस चालक की गवाही का हवाला देते हुए कहा कि पिकअप वाहन ओवरटेक करने के प्रयास में बस से टकराया था और अधिकरण ने बस चालक की गवाही को उचित महत्व नहीं दिया। वहीं, मृतक पक्ष की ओर से कहा गया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही, एफआईआर तथा विवेचक द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मैप से स्पष्ट है कि रोडवेज बस गलत दिशा से आ रही थी, जिससे यह दुर्घटना हुई। मामले पर कोर्ट ने कहा कि अधिकरण ने केवल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर ही नहीं, बल्कि विवेचना अधिकारी द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मैप, एफआईआर और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी समुचित मूल्यांकन किया था। रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि रोडवेज बस गलत दिशा से आ रही थी, जिसके कारण पिकअप वाहन से टक्कर हुई। न्यायालय ने माना कि अधिकरण के निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप हैं और उनमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या विसंगति नहीं है। इसलिए फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता, इन सभी तथ्यों के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीएसआरटीसी की अपील को खारिज कर दिया और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा मृतक के परिजनों को दिए गए ₹14.45 लाख के मुआवजे तथा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आदेश को यथावत बनाए रखा।