FATEHPUR NEWS: एक सितंबर 2025 से टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य किए जाने संबंधी शासनादेश के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने सोमवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जिला महामंत्री विजय त्रिपाठी के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षकों ने डाक बंगला पहुंचकर सांसद नरेश उत्तम पटेल को ज्ञापन सौंपा और संसद में इस मुद्दे को उठाकर शासनादेश वापस कराने की मांग की। शिक्षकों ने सांसद को दिए गए ज्ञापन में कहा कि टीईटी अनिवार्यता संबंधी आदेश से प्रदेश के बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार एक सितंबर 2025 के शासनादेश को तत्काल निरस्त कर पूर्व की व्यवस्था बहाल करे, जिससे शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जा सके। शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षकों का पूरा समय विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास और विद्यालयों के संचालन में लगता है। ऐसे में बार-बार नई शर्तें लागू किए जाने से शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। जिला महामंत्री विजय त्रिपाठी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहा है। यदि शासन ने शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का उद्देश्य केवल अपने अधिकारों की रक्षा करना और शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। सांसद नरेश उत्तम पटेल ने शिक्षकों की बात ध्यानपूर्वक सुनने के बाद उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस विषय को संसद के आगामी सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, अखिलेश त्रिपाठी, दिनेश सिंह, योगेंद्र कुमार, अनिल वर्मा, शैलेन्द्र उमराव सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं जनपद के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। ज्ञापन के माध्यम से सभी ने एक स्वर में टीईटी अनिवार्यता संबंधी शासनादेश समाप्त कर पूर्व व्यवस्था लागू करने की मांग की।







