वितरण कर्मियों की गुंडागर्दी: पासबुक, पर्ची व DAC के बावजूद नहीं दिया गैस
SIDHARTHNAGAR NEWS: बढ़नी युगकृष्णा इंडियन गैस सर्विस द्वारा उपभोक्ताओं के उत्पीड़न और गैस वितरण में भारी अनियमितता का मामला गरमाता जा रहा है। उपभोक्ताओं के पास गैस पासबुक, बकायदा नाम की मोहर व तारीख लगी एजेंसी की पर्ची और मोबाइल में डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) खारिज होने का डिजिटल साक्ष्य मौजूद है। इन तीन-तीन पुख्ता प्रमाणों के बावजूद उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी देने के बजाय भीषण गर्मी में लाइनों में खड़ा किया जा रहा है और गैस देने से इनकार किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर कालाबाजारी की आशंका को जन्म दे रहा है। पिछले 15 दिनों से क्षेत्र के भोले-भाले उपभोक्ता इस भीषण अव्यवस्था के कारण एजेंसी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आरोप है कि एजेंसी प्रबंधन द्वारा उपभोक्ताओं के मोबाइल से डीएसी तो खारिज कर दिया जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें गैस सिलेंडर के बजाय केवल तारीख लिखी हुई एक पर्ची थमा दी जा रही है। मामला मंगलवार को तब और गंभीर हो गया जब उपभोक्ता सुबह से ही गांधी आदर्श विद्यालय बढ़नी के प्रांगण के बाहर लाइन लगाकर खड़े थे, लेकिन बाद में सूचना मिली कि वितरण वहां न होकर बढ़नी सहकारी गन्ना समिति के दफ्तर पर हो रहा है। भूखे-प्यासे उपभोक्ता जब गन्ना समिति दफ्तर पहुंचे और लाईन में लग कर पर्ची दिखाकर सिलेंडर मांगा, तो नए नियुक्त वितरण कर्मियों ने मोहर लगी आधिकारिक पर्ची को ही ‘फर्जी’ बताकर उपभोक्ताओं को भगाना शुरू कर दिया। जब जनता ने नियमों के तहत गैस की मांग करते हुए इसका विरोध किया, तो कर्मचारी गाली-गलौज पर उतारू हो गए और उपभोक्ताओं को सिलेंडर चोरी व नकदी छिनैती के झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की सीधी धमकी देने लगे। इसी दौरान जनहित में इस अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे एक स्थानीय पत्रकार को भी रसूख की धौंस दिखाते हुए और खुद को एक संगठन का बताते हुए मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी गई, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। तनाव और हंगामे की सूचना मिलते ही बढ़नी चौकी इंचार्ज वीरेंद्र यादव करीब 7-8 पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। चौकी इंचार्ज ने जब कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाने और शांतिपूर्वक नियमों के तहत वितरण करने के निर्देश दिए, तो वितरण कर्मी पुलिस को सामने देख गैस सिलेंडरों से लदी गाड़ी को मौके पर ही लावारिस छोड़कर भाग खड़े हुए, जिससे वितरण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई।उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ और सप्लाई इंस्पेक्टर को फोन से सूचना दी गई इसके बाद उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ ,सप्लाई इंस्पेक्टर राणा प्रताप सिंह,ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उच्चाधिकारियों और एजेंसी मालिक के बीच फोन पर हुई वार्ता और कड़े विधिक एवं प्रशासनिक रुख के बाद आखिरकार कर्मचारियों के पैर उपरे। अधिकारियों के सख्त निर्देश और पुलिस बल की मुस्तैद निगरानी में बचे हुए सिलेंडरों का वितरण शुरू कराया जा सका। पीड़ित उपभोक्ताओं ने जिले के उच्चाधिकारियों से इस पूरे सिंडिकेट, स्टॉक रजिस्टर और गैस की कथित कालाबाजारी की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस पूरे मामले में जब गैस एजेंसी मालिक रवि प्रकाश श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा कि जो सफेद पर्ची जारी हुई है, उसमें से दो-चार लोगों को ही गैस दे पाएंगे। एजेंसी मालिक के इस कबूलनामे के बाद अब जनता और प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर सिलेंडर देना ही नहीं था, तो आखिर सैकड़ों उपभोक्ताओं को वह सफेद पर्ची क्यों जारी की गई? उनके मोबाइल से डीएसी क्यों खारिज किया गया? डिजिटल रिकॉर्ड में डिलीवरी ‘सफल’ दिखाकर हकीकत में उपभोक्ताओं को सिलेंडर न देने का यह खेल आखिर किसके शह पर चल रहा है, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। अब उपभोक्ताओं को इस चक्रव्यूह से निकालने के लिए जिला प्रशासन की ठोस विधिक कार्रवाई का इंतजार है।







