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बिना निष्पक्ष जांच दर्ज हुई एफआईआर पर उठे सवाल, महिला ने लगाई न्याय की गुहार

एकतरफा कार्रवाई से पुलिस की कार्यशैली कटघरे में
JHANSI NEWS: थाना सदर बाजार क्षेत्र में दर्ज एक एफआईआर को लेकर अब पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। भट्टागांव निवासी श्रीमती पूजा शर्मा पत्नी विकास शर्मा उर्फ बंटी शर्मा ने जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके साथ हुई घटना की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार 22 मई  की शाम करीब 7:30 बजे पूजा शर्मा अपने पति के साथ घर लौट रही थीं। आरोप है कि सदर बाजार में स्थित नारायण चाट के पास एक युवक अपनी महिला मित्र के साथ स्कूटी से तेज रफ्तार एवं लापरवाही से आया और उनकी गाड़ी के सामने कट मार दिया। इससे बड़ा हादसा होते-होते बचा। विरोध करने पर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। महिला का आरोप है कि युवक और उसके साथ मौजूद युवती ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया । इतना ही नहीं, कथित रूप से युवक ने धमकाने का प्रयास किया। महिला द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश करने पर मोबाइल छीनने का भी प्रयास किया गया। आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो सका। पीड़िता का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने थाना सदर बाजार पहुंचकर शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उल्टा उसी दिन दूसरे पक्ष की ओर से उनके खिलाफ एफआईआर बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। महिला का आरोप है कि पुलिस ने बिना निष्पक्ष जांच और तथ्यों की पड़ताल किए एकतरफा कार्रवाई कर दी। मामले को लेकर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि किसी भी शिकायत पर बिना गहन जांच-पड़ताल किए सीधे मुकदमा दर्ज कर देना पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है। यदि किसी भी व्यक्ति के प्रार्थना पत्र पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी सभ्रांत परिवार या व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज होने लगे, तो इससे न केवल निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है बल्कि पुलिस की निष्पक्ष छवि भी धूमिल होती नजर आती है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस का दायित्व दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच करना है, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को मानसिक, सामाजिक और कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े। जल्दबाजी में दर्ज मुकदमे कई बार लोगों के सम्मान पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर देते हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है।
फिलहाल महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई एवं उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की सत्यता की जांच कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का क्या जवाब सामने आता है।