राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता ने तमिलनाडु के राज्यपाल को भी वापस बुलाये जाने की उठाई आवाज
PRATAPGARH NEWS: राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने आपरेशन सिन्दूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान की मदद की स्वीकरोक्ति को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए गंभीर चुनौती कहा है। उन्होने कहा कि चीन ने दुनिया के सामने खुलकर यह कह दिया है कि भारत के खिलाफ चार दिन चले संघर्ष के दौरान उसने पाकिस्तान को सेटेलाइट, उपकरण तथा रणनीतिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान की थी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि इसके बावजूद पीएम मोदी इस अहम मसले पर भी खामोश हैं। उन्होने प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि चीन के साथ व्यापारिक समझौता कर आखिर उसे क्यों लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होने कहा कि चीन भारत के व्यापार से लाभ प्राप्त कर दुश्मन देश की मदद करता रहा। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री को चीन के इस दुस्साहसिक खुलासे के बाद दृढ़ता दिखाते हुए फौरन चीन से व्यापारिक समझौता तोड़ लेना चाहिए। वहीं सांसद प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी के अपमान के मामले में सरकार द्वारा एक साल बाद भी मुकदमा चलाने की अनुमति नही देने को भारतीय सेना के साथ देशवासियों के लिए पीड़ाजनक कहा है। उन्होने कहा कि आपरेशन सिन्दूर में कर्नल सोफिया सेना के उच्च पदस्थ अधिकारी के रूप में भारत का चेहरा बनी थी। उन्होने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने धार्मिक एवं अधार्मिक आधार पर कर्नल सोफिया पर एक खतरनाक एवं बेहद अपमानजनक टिप्पणी की। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस संवेदनशील मसले पर एसआईटी का गठन किया गया। उन्होने कहा कि एसआईटी ने अभियोजन को मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की सरकार से अनुमति मांगी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह अनुमति एसआईटी को दो सप्ताह में ही अवश्य मिल जानी चाहिए थी। उन्होने कहा कि सरकार ने एक साल से अधिक अभियोजन के लिए अनुमति नही दी तब सुप्रीम कोर्ट को सीधे सरकार को फटकार लगानी पड़ी है। उन्होने कहा कि सशस्त्र बलों पर इस प्रकार की अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण एवं खतरनाक टिप्पणी के बावजूद विजय शाह का मंत्रि परिषद में बना रहना आश्चर्यजनक है। उन्होने कहा कि मुकदमा चलाने के लिए अनुमति में सुप्रीम कोर्ट के फटकार से यह तय हो गया है कि इस मामले में राज्य सरकार ही नहीं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी जबाबदेह हैं। उन्होने सशस्त्र बलों से पीएम व गृहमंत्री से इस संवेदनशील मसले में नैतिक जिम्मेदारी के तहत माफी मांगने पर जोर दिया है। सांसद प्रमोद तिवारी ने तमिलनाडु में सबसे बड़े दल को सरकार गठन के लिए आमंत्रित न करने के कदम को राज्यपाल के द्वारा लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होने कहा कि संविधान में साफ व्यवस्था है कि बहुमत विधानसभा में सदन में मौजूद उपस्थित सदस्य संख्या के तहत आधे से एक का है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल संविधान तथा परम्परा के खिलाफ अलोकतांत्रिक आचरण कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि ऐसे में राज्यपाल को या तो फौरन वापस बुलाना चाहिए अथवा उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होने कहा कि भाजपा से लोकतंत्र को बचाने तथा मोदी सरकार की अपरिपक्वता के चलते देश की अर्न्तराष्ट्रीय पटल पर प्रतिष्ठा को भी सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस और विपक्ष सदन से सड़क तक लोकतांत्रिक कड़ा विरोध एवं असहमति जारी रखेगी। सांसद प्रमोद तिवारी का बयान शनिवार को मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।







