कुछ सेकंड की शोहरत के लिए दांव पर लगती पूरी जिंदगी
प्रातः काल एक्सप्रेस
JHANSI NEWS: आज का युवा “रील” की दुनिया में तेजी से खोता जा रहा है। मोबाइल स्क्रीन पर कुछ सेकंड की लोकप्रियता पाने की चाह ने जीवन के असली उद्देश्यों को पीछे धकेल दिया है। जहां एक ओर सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति का नया मंच दिया, वहीं दूसरी ओर यह लत बनकर युवाओं के भविष्य को निगलती नजर आ रही है। “दिखने में मस्त, भीतर से त्रस्त” — यही आज के रील-प्रेमी युवाओं की सच्चाई बनती जा रही है। रील बनाने का शौक अब महज मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक जुनून और कई बार नशे की तरह युवाओं पर हावी हो चुका है। लाइक्स, व्यूज़ और फॉलोअर्स की दौड़ में युवा अपनी पढ़ाई, करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं। वे वास्तविक उपलब्धियों की बजाय वर्चुअल पहचान को प्राथमिकता देने लगे हैं। यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व और मानसिक संतुलन पर भी असर डाल रही है। चिंता का विषय यह भी है कि रील बनाने के चक्कर में कई युवक-युवतियां गलत संगत और प्रेमजाल में फंस जाते हैं। ऑनलाइन पहचान से शुरू हुई दोस्ती कब भावनात्मक शोषण या अपराध की ओर मुड़ जाती है, इसका अंदाजा उन्हें तब होता है जब बहुत देर हो चुकी होती है। कई मामलों में ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और यहां तक कि आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता तक देखने को मिल रही है। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि समाज के लिए भी खतरा बनती जा रही है। इसके अलावा, खतरनाक स्टंट और ट्रेंड्स का अंधानुकरण भी युवाओं को जोखिम में डाल रहा है। कुछ सेकंड की वायरल वीडियो के लिए जान जोखिम में डालना अब आम होता जा रहा है। यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं की सोच और निर्णय क्षमता पर कितना गहरा हो चुका है। हालांकि, यह कहना गलत होगा कि रील या सोशल मीडिया पूरी तरह नकारात्मक हैं। यदि सही दिशा और संतुलन के साथ उपयोग किया जाए, तो यह प्रतिभा को मंच देने और करियर बनाने का माध्यम भी बन सकता है। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब यह साधन लक्ष्य बन जाता है। समाज, परिवार और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को इस आभासी दुनिया के खतरों के प्रति जागरूक करें। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और उनके डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें। वहीं युवाओं को भी आत्मचिंतन करना होगा कि वे अपने समय और ऊर्जा का उपयोग किस दिशा में कर रहे हैं। अंततः, यह समझना जरूरी है कि जीवन की असली सफलता स्क्रीन पर नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया में मेहनत, अनुशासन और सही निर्णयों से मिलती है। रील की चकाचौंध क्षणिक है, लेकिन उसके दुष्परिणाम लंबे समय तक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि युवा इस आभासी आकर्षण से बाहर निकलकर अपने भविष्य को सही दिशा दें।







