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जुम्मतुल विदा पर बारगाहे खुदा में झुके सिर-अमन चैन खुशहाल भारत की मांगी दुआ

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प्रयागराज। मुकद्दस माहे रमजान के तेईस रोजे मुकम्मल हो गए।वहीं अब तक चैथा जुमा जुम्मतुल विदा यानि माहे रमजान का आखरी जुमा समझ कर पढ़ा गया। तीसवें रोजे वाले दिन भी जुमा पड़ रहा है लेकिन अगर उन्नतिस का चांद हो गया तो अगले जुमा को ईद उल फितर पड़ेगी और अगर उन्नतिस को चांद नहीं दिखाई दिया तो माहे रमजान का पांचवां जुमा तीस रमजान को एक बार  फिर से जुम्मतुल विदा की नमाज पढ़ी जाएगी।इसी प्रकार सरकार की गाइड लाइन का पालन करते हुए मस्जिदों के अन्दर बा जमात नमाज अदा की गई।कहीं कहीं नमाजियों की संख्या अधिक होने पर दो बार जमात के साथ नमाज ए जुमा अदा कराई गई। चैक जामा मस्जिद,शाह वसी उल्लाह मस्जिद रौशन बाग,चक शिया जामा मस्जिद, मस्जिद बीबी खदीजा करैली,अबुबकर मस्जिद करैली,दायरा शाह अजमल की खानकाह मस्जिद, सिविल लाइंस धोबी घाट की हरी मस्जिद ,बैदन टोला की लतर व कंगूरे वाली मस्जिद, अटाला की बड़ी मस्जिद, रेलवे स्टेशन की शीशे वाली मस्जिद समेत लगभग तीन सौ छोटी बड़ी सभी मस्जिदों में तय समय पर मोअज्जिन ने अजान दी तो सफेद कुर्ता पायजामा और सर पर टोपी लगाए मुस्लिम समाज के लोगों ने छोटे बच्चों व बुजुर्गों के साथ मस्जिद का रुख किया। मस्जिदों से नमाजियों को खुत्बा सुनाते हुए पेश इमाम व इमाम ए जुमा वल जमात ने माहे रमजान की फजीलत ,इसी माह मुकद्दस किताब कुरआन ए मजीद के आसमान से अपने बन्दों को राहे रास्त पर लाने को भेजी गई जो आज आलमे इस्लाम की सब से पाक और अकीदत से उस कुरआन के एक एक पारे और एक एक हुरुफ पर अमल करने की जरुरत है।खुत्बे में यह भी बताया गया कि हमें अपने धर्म और अल्लाह द्वारा भेजी गई पाक किताब कुरआन ए मजीद की एक एक पंक्ति पर नाज करते हुए अमल करना चाहिए।लेकिन अगर हम अपने मुल्क के कानून का उलंघन करते हैं तो हम गुनाहगार भी होंगे।इस लिए इस्लाम में साफ तौर से कहा गया है मुल्क का कानून सब से ऊपर है।लेकिन जहां तक जायज हो ।अगर हमारे मजहबी अहकामात में कानून रुकावट पैदा करे तब आप उसका प्रतिरोध करें लेकिन कानून का उलंघन करके नहीं।यह बातें जुमा की नमाज में अपने खुतबे में ओलमा ने बयान की।उम्मुल बनीन सोसायटी के महासचिव सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार सुन्नत जमात की सभी छोटी बड़ी मस्जिदों में तय वक्त पर अजान के बाद जुम्मतुल विदा की नमाज पढ़ाई गई तो वहीं शिया जामा मस्जिद चक जीरो रोड पर और मस्जिद बीबी खदीजा करैली सैदपुर की मस्जिद में शिया समुदाय के नमाजियों ने बड़ी संख्या में पहुंच कर नमाज पढ़ी।
अंतरराष्ट्रीय यौमे कुद्स पर बाहों में काली पट्टी बांध कर बैतुल मुकद्दस की आजादी को जुटे शिया नमाजी कब्लिा ए अव्वल बैतुल मुकद्दस जो इजराइल की कैद में है उसकी आजादी को पूर्व वर्षों की तरहां इस बार भी शिया समुदाय ने यौमे कुद्स पर विरोध जताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज पहुंचाने और कब्लिा ए अव्वल को आजाद कराने में सहयोग की अपील की ।