मौलाना ने सुनाया ज़रबत-ए-मौला अली का वाक़िया तो सिसक-सिसक कर रोने लगे अज़ादार
MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) 20 रमज़ान की देर रात मौला अली अलैहिस्सलाम की यौमे-ए-शहादत के मौके पर इमामबाड़ा स्थित कर्बला में अंजुमन अंसार-ए-हुसैन तरकापुर की ओर से मजलिस का एहतमाम किया गया। इस मौके पर मौला अली अलैहिस्सलाम की बारगाह में नज़र पेश की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अबरार हुसैन वारसी ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत का दर्दनाक वाक़िया बयान किया। उन्होंने कहा कि 19 रमज़ान 40 हिजरी की नमाज़-ए-फ़ज्र के लिए जब मौला अली अलैहिस्सलाम मस्जिद-ए-कूफ़ा में तशरीफ़ लाए और इबादत में मशगूल हो गए। मौलाना ने बताया कि उसी मस्जिद में एक बदनसीब शख्स अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम लानती पहले से घात लगाकर बैठा हुआ था। जब नमाज़ शुरू हुई और मौला अली सज्दे में गए, उसी वक्त उसने ज़हर में डूबी हुई तलवार से आपके मुबारक सर पर जोरदार हमला कर दिया। इस हमले से मौला अली बुरी तरह जख्मी हो गए और मस्जिद-ए-कूफ़ा में कोहराम मच गया। नमाज़ियों में खलबली मच गई और हर तरफ से आवाज़ आने लगी कि अमीरुल मोमिनीन पर हमला हो गया। लोग रोते हुए मौला अली को संभालने लगे और पूरे शहर कूफ़ा में ग़म की लहर दौड़ गई।मौलाना अबरार हुसैन वारसी ने बताया कि जब मौला अली अलैहिस्सलाम को घर लाया गया तो उनके बड़े बेटे इमाम हसन और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने बाबा की हालत देखकर रो पड़े। उसी वक्त बेटी बीबी ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा पर्दे के पीछे खड़ी थीं। जब उन्होंने अपने बाबा के सर से खून बहते देखा तो रोते हुए दर्द भरी आवाज़ में कहा कि “बाबा यह किसने किया” उस वक्त घर में ऐसा ग़म का माहौल था कि हर आंख नम थी। कूफ़े के हर घर से रोने की आवाज़ें आने लगीं और लोग पुकार रहे थे,या अली… हम यतीम हो गए। या अली… हम यतीम हो गए। मौलाना ने बताया कि ज़रबत लगने के बाद मौला अली अलैहिस्सलाम दो दिन तक बिस्तर-ए-अलालत पर रहे। ज़हर का असर बढ़ता गया और आखिरकार 21 रमज़ान की शब को अमीरुल मोमिनीन मौला अली अलैहिस्सलाम इस दुनिया से रुख़्सत हो गए और पूरी उम्मत ए मुस्लिमाँ ग़मगीन हो गई। जब मौलाना अबरार हुसैन वारसी ने यह मसायब बयान किए तो मजलिस में मौजूद अज़ादार हिचकियां बांधकर रोने लगे और पूरा माहौल ग़मगीन हो गया। मजलिस के बाद मौला अली अलैहिस्सलाम की नज़र दिलाई गई और ताबूत भी उठाया गया। इस दौरान इरशान अंसारी ने अपनी सुरीली आवाज़ में मौला अली की बारगाह में सलाम पेश किया, जबकि हाफिज सैफ ने नज़र में कुरान-ए-पाक की तिलावत की। चमन वारसी ने मौला अली अलैहिस्सलाम की शान में मनकबत पेश कर अज़ादारों को ग़मगीन कर दिया। इस अवसर पर मजलिस में रिज़वान अंसारी, शाहिद, शमशेर अली, बेलाल और बाबा क़म्बर शाह वारसी समेत बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे।







