Home उत्तर प्रदेश भारतीय संस्कृति, सभ्यता को जानना, समझना जरूरी: डा0 दीप्ति खरे

भारतीय संस्कृति, सभ्यता को जानना, समझना जरूरी: डा0 दीप्ति खरे

वरिष्ठ प्रो रश्मि श्रीवास्तव, प्रो (डा) आरपी वर्मा ने किया प्रोत्साहित
पारंपरिक वेशभूषा पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता संपन्न
PRAYAGRAJ NEWS: राजकीय महाविद्यालय गोसाई खेड़ा, उन्नाव में  कल्चरल क्लब की ओर से भारतीय संस्कृति पर आधारित प्रादेशिक परिधान प्रतियोगिता का आयोजन आज किया गया। इस प्रतियोगिता में छात्र – छात्राओं ने भारत के विभिन्न प्रदेशों की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर रंगारंग प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डा दीप्ति खरे ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ दीप्ति खरे, समस्त प्राध्यापक तथा कर्मचारियों ने भी भारत के पारंपरिक परिधान धारण कर छात्र – छात्राओं का उत्साह वर्धन किया। प्राचार्य  ने केरल का पारंपरिक परिधान कसावु धारण कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। वरिष्ठ प्रो रश्मि श्रीवास्तव तथा प्रो (डा) आरपी वर्मा ने छात्राओं को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सुनीता रावत ने करते हुए राजस्थानी, डॉ कीर्ति मदनानी ने गुजराती, डॉ प्रियंका गौर, डॉ ज्योति बाजपेई, डॉ दीक्षा शर्मा ने बंगाली वेशभूषा एवं डॉ पूनम चैहान, डॉ सोहन यादव व डॉ राधेश ने उत्तर प्रदेश का पारंपरिक परिधान धारण कर भारतीय संस्कृति में विभिन्नता में एकता का संदेश दिया। छात्र, छात्राओं में हिमांशी ने मणिपुर का फनेक, तान्या ने पंजाबी, अंकिता ने मिजोरम, सोनाली ने उड़ीसा, ज्योति रावत ने उत्तर प्रदेश, आरती ने हरियाणा, पारुल ने कश्मीरी, अंशिका यादव ने केरल, अदिति यादव ने गुजराती, चैताली यादव ने तमिलनाडु, अवनी जायसवाल ने महाराष्ट्रीयन, आकाश ने कर्नाटक, नितेश ने तमिलनाडु राज्य के पारंपरिक परिधान प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में चैताली व अंशिका को प्रथम, अवनी को द्वितीय, नितेश को तृतीय तथा पारुल, तान्या व आकाश को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। वरिष्ठ प्रो आरपी वर्मा ने छात्र – छात्राओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी। प्राचार्या डा दीप्ति खरे ने कहा कि भारत विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, यहां की संस्कृति में प्रत्येक क्षेत्र की विभिन्न भाषाएं, वेशभूषा, कला , नृत्य, त्यौहार, एवं परंपरा का समागम है। उन्होने कहा कि इस तरह के आयोजन छात्र, छात्राओं में भारतीय संस्कृति को गहराई से समझने और आत्मसात करने में बहुमूल्य भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ सुनीता रावत ने प्राचार्य  तथा उपस्थित सभी प्राध्यापक बंधु व कर्मचारी गण का धन्यवाद ज्ञापित किया ।