तीन वर्षों की असाधारण उपलब्धियों के साथ 68वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में होंगे शामिल
JHANSI NEWS: झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय, अनुभवी और दूरदर्शी सांसद एवं राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, अनुराग शर्मा, एक बार पुनः वैश्विक कूटनीति और लोकतांत्रिक संवाद के केंद्र में बुंदेलखंड के गौरव को बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वह 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक कैरिबियन द्वीप राष्ट्र बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में आयोजित होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेंगे, जिस परंपरा का निर्वहन वह वर्षों से करते आ रहे हैं। यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल देशों के 56 सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को एकजुट करने वाला सबसे बड़ा और सबसे पुराना मंच है, जहां संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने, सुशासन, समावेशी विकास और 21वीं सदी की उभरती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाता है। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय ‘द कॉमनवेल्थ: ए ग्लोबल पार्टनर’ है, जो बहुध्रुवीय दुनिया में राष्ट्रमंडल देशों के बीच मजबूत साझेदारी और वैश्विक मंच पर उनकी सामूहिक आवाज के महत्व को रेखांकित करता है। सांसद अनुराग शर्मा का यह प्रतिनिधित्व ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रहा है जब वह सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में अपने तीन वर्षों के ऐतिहासिक और अत्यंत सफल कार्यकाल का समापन करने जा रहे हैं। उनका यह कार्यकाल संगठन के लिए एक नए युग का सूत्रपात करने वाला रहा है और इसे सीपीए के इतिहास में सर्वाधिक परिवर्तनकारी दौरों में से एक माना जा रहा है। विगत तीन वर्षों में, सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में संगठन में अभूतपूर्व संरचनात्मक और प्रशासनिक क्रांतियाँ आई हैं। उनकी सबसे बड़ी और दूरगामी उपलब्धि यह है कि सीपीए को ब्रिटेन में केवल एक ब्रिटिश चैरिटी के रूप में काम करने की पुरानी, सीमित व्यवस्था से बाहर निकालकर, एक विशाल, स्थायी और अंतर्राष्ट्रीय संगठन (इंटरनल बॉडी) के रूप में कानूनी मान्यता दिलाई गई है। यह बदलाव सांसद शर्मा की प्रशासनिक क्षमता और अथक प्रयासों का परिणाम है, जिसने संघ की दक्षता, वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और वैश्विक पहुंच को कई गुना बढ़ा दिया है। सांसद शर्मा की संगठनात्मक समझ और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव की वरिष्ठता सीपीए के लिए एक अमूल्य पूंजी रही है। वह इस संगठन के बहुत ही सीनियर पदाधिकारी के रूप में प्रतिष्ठित हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दो अलग-अलग राष्ट्रीय अध्यक्षों और जनरल सेक्रेट्ररियों के साथ प्रभावी ढंग से समन्वय स्थापित करते हुए संगठन के एजेंडे को सफलता के नए सोपान तक पहुँचाया है। उन्हीं के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में सीपीए के लिए एक सर्व-समावेशी और आधुनिक नए कॉन्स्टिट्यूशन (संविधान) का निर्माण भी किया गया है। वह इस संविधान निर्माण समिति में सबसे अनुभवी और सीनियर पदाधिकारी थे, और यह नया, दूरदर्शी ढांचा सीपीए को भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कार्यप्रणाली के पदचिह्नों पर चलने और एक मजबूत इंटरनल बॉडी के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह परिवर्तन सीपीए को उसके शताब्दी से अधिक के इतिहास में सबसे बड़े कानूनी और प्रशासनिक सुधारों में से एक प्रदान करता है।







