हर महीने लगभग 1000 अमूल्य ग्रन्थों का डिजिटलीकरण हो:प्रो.बिहारी लाल (कुलपति)
VARANASI NEWS: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय ज्ञान की अमूल्य धरोहर को संरक्षित एवं विश्वव्यापी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिजिटलीकरण परियोजना का औपचारिक शुभारंभ करते हुए विश्व प्रसिद्ध पुस्तकालय में व्यक्त करते हुए बताया कि यह परियोजना सनातन धर्म विश्व विश्वविद्यालय ट्रस्ट (कोविलूर मठ) के सहयोग से आरंभ की गई है, जो भारतीय कला, संस्कृति, परम्परा और ज्ञान-संपदा के संरक्षण हेतु निरन्तर कार्यरत है।संक्षिप्त कार्यक्रम के अन्तर्गत विश्वविद्यालय को एक अत्याधुनिक स्कैनर मशीनरी भेंट की गई, जिसके माध्यम से संस्कृत के दुर्लभ एवं प्राचीन ग्रन्थों का डिजिटलीकरण प्रारंभ होगा। यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी योजनाओं के अंतर्गत और अधिक विस्तार हो पाएगा। ट्रस्ट का लक्ष्य है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में हर महीने लगभग 1000 अमूल्य ग्रन्थों का डिजिटलीकरण हो, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय ज्ञान का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित हो सके।सनातन धर्म विश्व विश्वविद्यालय ट्रस्ट विगत सात वर्षों से तमिल भाषा की 7300 से अधिक प्राचीन पुस्तकों का डिजिटलीकरण कर चुका है और प्रतिमाह 1000 नई पुस्तकों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। अब यह सेवा संस्कृत ग्रन्थों के संरक्षण तक विस्तारित की जा रही है। शुभारम्भ अवसर पर कोविलूर मठ के पीठाधीश्वर कोविलूर स्वामी की गरिमामयी उपस्थिति में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 बिहारी लाल शर्मा ने वैदिक अनुष्ठान के साथ परियोजना को क्रियाशील किया। इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार शुक्ल एवं पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो0 राजनाथ भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।







