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सिद्धपीठ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में चतुर्थ वार्षिकोत्सव पर भव्य भंडारा, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

FATEHPUR NEWS: शहर स्थित सिद्धपीठ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, पत्थरकटा चौराहा में मंगलवार को चतुर्थ वार्षिकोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर में स्थापित श्री लक्ष्मी नारायण भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ। इसके उपरांत श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक रूप से सुंदरकांड पाठ किया गया। धार्मिक वातावरण के बीच हवन-पूजन, आरती एवं भक्ति गीत-संगीत का आयोजन हुआ, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ धार्मिक आयोजनों में सहभागी बने और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर प्रबंधन की ओर से बताया गया कि यह मंदिर ब्रह्मलीन माता शीतला देवी एवं ब्रह्मलीन पिता राजनारायण जायसवाल, पुत्र ब्रह्मलीन बाबा रामचंद्र जायसवाल द्वारा निर्मित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में स्थापित है। चतुर्थ वार्षिक उत्सव के अवसर पर आए हुए श्रद्धालुओं और भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। उपस्थित लोगों ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न कराया गया। इस अवसर पर अरुण कुमार जायसवाल, तरुण कुमार जायसवाल, अतुल जायसवाल, देशराज, यशपाल, कमल इंजीनियर, राजीव, डॉ. सिद्धार्थ, आरिनी, आराध्या, अदिति, आदित्य राज, अधिराज, त्रिजल राज, वैष्णवी सहित समस्त जायसवाल परिवार उपस्थित रहा। इसके अतिरिक्त विद्या देवी, शांति देवी, नीलम, साकेत गुप्ता, एडवोकेट सीमा, नीरज जायसवाल, बीना एवं दिलीप जायसवाल, अक्षत, प्रज्ञा, अक्षरा, राजपति जायसवाल, शोभा जायसवाल, संध्या, रिशू, शीलू, डॉ. श्वेता, डॉ. संजीव, कमलेश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं और वार्षिकोत्सव के सफल आयोजन की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र में आध्यात्मिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।