अपनी भाषा, अपनी संस्कृति का उन्नयन करना चाहिए: डीआईओएस
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PRAYAGRAJ NEWS: श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाण द्वारा संचालित श्री महानिर्वाण वेद संस्कृत स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय दारागंज प्रयागराज में स्थापना समारोह के 116 वर्ष पूर्ण होने के पर संस्कृत महाविद्यालय माध्यमिक विद्यालय, सभी शिक्षक, सेवानिवृत्ति एवं प्राचार्य तथा प्रधानाचार्ययों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अखाड़ा के सचिव श्री महंत यमुना पुरी महाराज की अध्यक्षता में बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो जीएस त्रिपाठी सहित अन्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। पूर्व कुलपति प्रो जीएस त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिमी देशों ने विश्व की भाषा को एक बाजार के रूप में मानता है लेकिन भारत एक परिवार के रुप में मानता है, यह हमारी संस्कृति एवं संस्कृत की देन है। उन्होने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओत प्रोत है। विशिष्ट अतिथि डीआईओएस डॉ संतोष कुमार राय ने संस्कृत के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि आगे भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए क्योंकि इस गुरुकुल प्रणाली में अन्य देशों की अपेक्षा जापान, चीन ने अपनी भाषा में ही अपने देश का उन्नयन करते हैं, इसी तरह हमें भी अपनी भाषा एवं अपनी संस्कृति उन्नयन करना चाहिए। माहानिर्वाण वेद संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक महंत यमुना पुरी महाराज ने छात्रों को संस्कृत समुपासकों की सराहना करते हुए महाविद्यालय के उत्थान उन्नयन के प्रेरणास्पद उपदेश प्रदान किया। महानिर्वाण वेद संस्कृत महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती शिवांगी पांडे ने सभी संस्कृत महाविद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, प्राचार्यों, प्रधानाचार्यो, शिक्षकों और महिलाओं का सम्मान करते हुए अंगवस्त्रम, प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। सारस्वत अतिथि भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, मुख्य वक्ता संजीव कुमार बाजपेई, डॉ लवलेश कुमार मिश्रा ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। संचालक ईश नारायण द्विवेदी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ कृपा शंकर मिश्रा ने किया। इस दौरान वरिष्ठ पार्षद विनय कुमार मिश्रा, पार्षद दारागंज अनुपमा पांडे सहित अन्य लोग थे।







