कहा कि भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय गंगाजल, करें अभिषेक
PRAYAGRAJ NEWS: भगवान भोले शंकर के सबसे प्रिय महीने श्रावण मास की शुरुआत गुरुवार 30 जुलाई से होने जा रही है। इस बार श्रावण मास में चार सोमवार पड़ रहे हैं। 3 अगस्त, 10 अगस्त,17 अगस्त और 24 अगस्त को जहां कुल चार सोमवार पड़ेंगे। वहीं इस बार तीसरे सोमवार यानी की 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी यानी नाग पंचमी भी पड़ेगी जबकि श्रावण मास में दो प्रदोष 10 अगस्त और 24 अगस्त को पड़ेंगे। वहीं श्रावण मास का समापन शुक्रवार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व पर होगा। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मश्रम महराज ने आज बताया कि सावन को भगवान शिव का मास इसलिए माना गया है कि अन्य देवी – देवता सुसुप्ता अवस्था में रहते हैं जबकि भगवान शिव ही जागृत होते हैं। उन्होंने कहा है कि भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय गंगाजल है, और जो भक्त भगवान शिव को एक लोटा गंगाजल चढ़ाता है भगवान भोलेनाथ उससे प्रसन्न हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मश्रम महराज ने बताया कि सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु शिवरात्रि के दिन व्रत करें और भगवान शिव का और निरंतर भगवान शिव के मंत्रों का जाप और पूजन करें उसके जन्म-जन्मांतर का पाप क्षय हो जाता है। उन्होने बताया कि सावन मास में पड़ने वाले सोमवार को व्रत और और भगवान शिव का महा अभिषेक करना चाहिए। उधर, श्रावण मास को लेकर संगम नगरी के शिवालियों में खास तैयारी की गई है। सावन के महीने में यूं तो शिवालियों में हर दिन श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं लेकिन चार सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि को खासी भीड़ उमड़ती है। इसलिए शिवालयों में भी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और अन्य प्रबंध किए गए हैं। प्रयागराज में प्रमुख रूप से यमुना तट पर स्थित मनकामेश्वर मंदिर, अरैल में स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर, दशाश्वमेध मंदिर, नागवासुकी मंदिर और पडिला महादेव जैसे मंदिरों में सावन को लेकर खास तैयारी की







