PRAYAGRAJ NEWS: मांडाखास गांव में शव को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी गांव में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने करीब सात घंटे तक भूमि की पैमाइश की, लेकिन सीमांकन पूरा न हो पाने के कारण इसे अगले दिन फिर से किए जाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन विभाग की भूमि का सीमांकन तय होने के बाद ही शव दफनाने की अनुमति दी जाएगी। बीते शुक्रवार सुबह मांडवी देवी धाम के समीप शव दफनाए जाने की सूचना पर ग्रामीणों ने सड़क पर बल्ली बांधकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया था और एंबुलेंस को रोक लिया था। ग्रामीणों का आरोप था कि जिस स्थान पर पक्की कब्र और मजार बनाई जा रही है, वह वन विभाग की भूमि है और उस पर अतिक्रमण किया जा रहा है। मृतका शाहजहां बेगम, मूल रूप से मुगलसराय (चंदौली) के अलीनगर पंचपेड़वा निवासी आजाद अली की मां थीं। आजाद अली वर्तमान में मुंबई के मलाड मालोनी क्षेत्र में रहते हैं। बृहस्पतिवार को मुंबई में इलाज के दौरान शाहजहां बेगम का निधन हो गया था, जिसके बाद आजाद अली अपनी मां का शव मांडाखास गांव लेकर पहुंचे थे। ग्रामीणों के विरोध के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर मांडा इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए एंबुलेंस को थाने पर खड़ा कराया। इसके बाद एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय, एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव, तहसीलदार जमुना प्रसाद और वन रेंजर अजय सिंह पुलिस एवं वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने देर शाम तक दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया। वन विभाग की ओर से भूमि सीमांकन के लिए 72 घंटे का समय मांगा गया था। शनिवार को राजस्व और वन विभाग की टीम ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक भूमि की पैमाइश की, लेकिन मांडा क्षेत्र का स्पष्ट भूमि नक्शा उपलब्ध न होने के कारण सीमांकन पूरा नहीं हो सका। अधिकारियों ने कहा कि पुनः नाप कर वन भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। वहीं, बढ़ते विवाद को देखते हुए मांडा इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर डटे रहे। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
मांडाखास निवासी शरीफ अहमद ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी इसी स्थान पर शव दफनाया गया था, तब न तो राजस्व विभाग और न ही वन विभाग ने कोई आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण अब परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।







