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वो शाम का बाज़ार था और आबिद-ए-बीमार इमाम ज़ैनुल आब्दीन की याद में निकला ताबूत का जुलूस

KAUSHAMBI NEWS: नगर पंचायत दारानगर कड़ा धाम के वार्ड संख्या 9 स्थित मोहल्ला सैय्यदवाड़ा में चौथे इमाम हज़रत इमाम ज़ैनुल आब्दीन अलैहिस्सलाम की याद में ताबूत का जुलूस निकाला गया  जिसमें बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर अहलेबैत (अ.) के प्रति अपनी मोहब्बत और अकीदत का इज़हार किया।कार्यक्रम में आयोजित मजलिस को मौलाना मुशाहिद हुसैन ने ख़िताब करते हुए वाक़े-ए-कर्बला के बाद इमाम ज़ैनुल आब्दीन(अ.) की सब्र, इस्तिक़ामत औरदीन-ए-हक़ की हिफ़ाज़त में निभाई गई अहम भूमिका पर रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैग़ामइंसानियत, सब्र और हक़ पर डटे रहने का पैग़ाम है।मजलिस के बाद नौहाख़्वानी का सिलसिला शुरू हुआ। बाक़र अली उर्फ़ इशरत ने दर्दभरा नौहा *वो शाम का बाज़ार था और आबिद-ए-बीमार*… पढ़ा जिसे सुनकर अज़ादारों की आँखेंअश्कबार हो उठीं। इसके बाद तकी हैदर और अरमान ने “सज्जाद रोके कहने लगे शाम-ए-शाम…” नौहा पेश किया, जिस पर अज़ादारों ने पुरसा देते हुए मातम किया।अंत में अकीदतमंदों ने ताबूत की ज़ियारत की और इमाम हुसैन  को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। पूरे आयोजन में ग़म, अकीदत और इश्क़-ए-अहलेबैत का रूहानी मंज़र देखने को मिला।