LUCKNOW/MIRZAPUR NEWS: (सुनील कुमार गुप्ता) रक्तदान को महादान कहा जाता है, और इसी महादान को जन-जन तक पहुँचाने वाले मिर्जापुर के उत्कृष्ट समाजसेवियों को रविवार को एक भव्य समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। निफा (NIFA) उत्तर प्रदेश द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में आयोजित ‘संवेदना 2’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘नेशनल सोशल इंपैक्ट अवार्ड 2026’ और ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ पुरस्कार प्रदान किए गए। इस गरिमामयी समारोह में रक्त केंद्र, मंडलीय चिकित्सालय मिर्जापुर के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) राम कुमार गुप्ता, तथा प्रमुख समाजसेवी संस्था ‘ साईं परिवार सेवा संगठन’ के अध्यक्ष शुभम गुप्ता एवं उपाध्यक्ष अमित गुप्ता को उनके अप्रतिम योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इन सभी को यह प्रतिष्ठित सम्मान समाज में रक्तदान के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने और बड़े पैमाने पर सफल रक्तदान शिविर आयोजित कराने के लिए दिया गया है। विशिष्ट अतिथियों के कर-कमलों से मिला सम्मान पुरस्कार वितरण समारोह में मंच की शोभा बढ़ाते हुए मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के रूप में महिला आयोग की अध्यक्षा डॉ. बबिता सिंह चौहान, लघु उद्योग मंत्री नटवर गोयल और डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति उपस्थित रहे। इन गणमान्य अतिथियों द्वारा मिर्जापुर के इन समाजसेवियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। मानवता की सेवा ही है सच्चा धर्म समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने सम्मानित होने वाले सभी सदस्यों के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। राम कुमार गुप्ता और ‘श्री साईं परिवार सेवा संगठन’ जैसे लोग व संस्थाएं, जो दिन-रात एक करके लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं, वे वास्तव में मानवता के सच्चे रक्षक हैं। उनके निस्वार्थ प्रयासों से ही आपात स्थिति में अनगिनत मरीजों को जीवनदान मिल पाता है।
भविष्य में अभियान को और तेज करने का संकल्प
सम्मान प्राप्त करने के पश्चात राम कुमार गुप्ता, शुभम गुप्ता और अमित गुप्ता ने इस प्रोत्साहन के लिए निफा (NIFA) उत्तर प्रदेश और सभी अतिथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त रूप से अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए एक नई ऊर्जा का कार्य करेगा। वे भविष्य में रक्तदान के इस महाभियान को और अधिक सशक्त बनाएंगे, ताकि रक्त के अभाव में किसी भी जरूरतमंद मरीज को अपनी जान न गंवानी पड़े।







