SAHARANPUR NEWS: नाग पंचमी का महापर्व इस बार 29 जुलाई दिन मंगलवार को मनाया जाएगा सनातन परंपरा से जुड़ जाने वाले नागों का सम्बन्ध सिर्फ देवी देवताओं से ही नहीं बल्कि मनुष्य के कल्याण से भी जुड़ा है नाग देवता की पूजा का हमारे शास्त्रों में भी विशेष महत्व है। आईए जानते हैं आखिर नाग देवता की पूजा का महत्व ।और फल नाग पंचमी का पर्व देश के बिहार ,बंगाल, हिमाचल, राजस्थान में उत्तर प्रदेश में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इन सभी राज्यों के इस महान पर्व के साथ कई परंपराएं भी जुडी हैं उत्तर भारत में नाग पंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से नाग बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इस पूजा से सांपों से जुड़े तमाम तरह के भय दूर होते हैं। नाग पंचमी के दिन पूजा के लिए दूध की मिटठी खीर व दही से खट्टी खीर भी बनाई जाती है। दोनों तरह की खीर का नाग देवता को भोग लगाया जाता है इस दही वाली खट्टी खीर के पीछे मान्यता है कि इसके खाने से नाग देवता का भय दुर होता है ।महिलाएं इस खीर को इसलिए खाती हैं। कि उनका सुहाग सही सलामत बना रहे नाग पंचमी के मौके पर नागों के बिल के पास दूध रखा जाता है। मानता है। कि ऐसा करने से नाग कुल प्रसन्न होता है। और अ हित नहीं करता सहारनपुर जिले के गांव महेशपुर व धूमगढ़ में सैकड़ो वर्ष पुराना नाग देवता का मंदिर है वहां पर बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु लोग आते हैं और मंदिर में नाग देवता पर दूध व दूध से बनी खीर तथा प्रसाद चढ़ाते हैं और मान्यता है कि गाय व भैंस का कामयाब न होने पर मन्नत मांगते हैं । तथा मन्नत पूरी होने पर उसका दूध व उसके दूध से बने खाद्य पदार्थ का भोग लगाया जाता है सैकड़ो साल से यहां पर हर रविवार को आकर नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए प्रसाद चढ़ाते हैं।







