BALRAMPUR NEWS: (कमाल खान) छात्र छात्राओं के चतुर्मुखी विकास व बौद्धिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए ये ज़रूरी है कि वो राष्ट्रनायकों,युग पुरुषों के जीवन और उनके संघर्षों से परिचित हों,वो सिद्धांतों, एवं आदर्शों को आत्मसात करके सफलता के नए नए कीर्तिमान बना सकते हैं। इसी उद्देश्य के तहत बलरामपुर जिले के पचपेड़वा स्थित जे.एस. आई.स्कूल में हर शनिवार को एक श्रृंखला “ज़रा याद उन्हें भी कर लो”की शुरुआत की गई है।जिसके तहत युग पुरुषों और महानायकों के जीवन से बच्चों को रूबरू कराया जाता है। इस शनिवार, 25, जुलाई , भारत की पहली महिला चिकित्सक आनंदीबेन जोशी के संघर्ष और विदेश में जाकर मेडिकल की पढ़ाई कर देश की पहली महिला चिकित्सक बनने की प्रेरणादायक कहानी को बच्चों को रूबरू कराया गया। मुख्यातिथि डॉ संगीता त्रिपाठी ने बच्चों को बताया कि आंनदीबाई जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 में ठाणे जिले के कल्याण में जमींदारों के एक रूढ़िवादी मराठी हिंदू परिवार में हुआ था। 9 साल की उम्र में उनकी शादी एक विदुर के साथ कर दी गई थी। आंनदी से उम्र में लगभग 20 साल बड़े उनके पति गोपालराव जोशी काफी प्रगतिशील विचारधारा वाले व्यक्ति थे। यह उनकी सोच और समर्थन ही था, जिसकी वजह से आंनदी को विदेश जाकर चिकित्सीय शिक्षा प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला डॉक्टर होने का गौरव प्राप्त हुआ। प्रबंधक सगीर ए ख़ाकसार ने कहा कि आनंदबेन जोशी ने उस वक्त यह कीर्तिमान बनाया जब समाज बहुत रूढ़िवादी था। भारत में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं था। भारत में ही नहीं अमेरिका में भी उन्हें बहुत सम्मान मिला। न्यूयॉर्क के पकिप्सी में एक कब्रिस्तान में एक हेडस्टोन पर लिखा है- आनंदीबाई जोशी एम डी (1865- 1887)- शिक्षा के लिए भारत छोड़ने वाली पहली ब्राह्मण महिला । ख़ाकसार ने कहा कि दूरदर्शन ने भी उनके जीवन पर आधारित एक धारावाहिक प्रसारित किया। वहीं महाराष्ट्र सरकार, उनके नाम पर एक स्वास्थ्य संबंधी फेलोशिप चला रही है। मराठी में उनके जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बनाई गई है। ये सभी सम्मान आनन्दी गोपाल जोशी की विरासत और महत्ता को दर्शाते हैं। मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद मेडिकल कॉलेज की स्थापना और लोगों की सेवा करने का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आनंदी बेन जोशी के संघर्ष के किस्से सुनकर बच्चे भाव विभोर हो गए. मुख्यातिथि को साल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उन्हें सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर रवि प्रकाश श्रीवास्तव, किशन श्रीवास्तव, शिव कुमार रेगमी ,किशोर श्रीवास्तव, सोबिया खान , सुशील यादव, मुदास्सिर अंसारी, दिनेश श्रीवास्तव ,सचिन मोदनवाल, शमा, , वंदना चौधरी, शारीबा खातून, अंजलि कसौधन, दीपा बाल्मीकि, जैनब , सरस्वती मौर्या, लक्ष्मी रेगमी, आदि के अलावा छात्र मौजूद रहे।







