Home उत्तर प्रदेश बारिश ने दिखाया नगर निगम का असली विकास, सड़कें बनीं तालाब

बारिश ने दिखाया नगर निगम का असली विकास, सड़कें बनीं तालाब

हर बरसात में दोहराती है समस्या, फिर भी जिम्मेदार नहीं ले रहे सबक
JHANSI NEWS: शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच नगर निगम क्षेत्र की बदहाल सड़कें विकास की तस्वीर पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। हल्की बारिश होते ही शहर की कई गलियां और सड़कें जलभराव की चपेट में आ जाती हैं। जगह-जगह जमा पानी और गहरे गड्ढों के कारण सड़कें रास्ता कम और ‘स्विमिंग पूल’ अधिक नजर आने लगती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की यह बदहाली केवल बारिश के मौसम की समस्या नहीं है। कई स्थानों पर लंबे समय से सड़क की ऊपरी परत उखड़ी हुई है और बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के साथ दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। नगर निगम की ओर से सड़क और नाली निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्य कराए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति कई स्थानों पर इन दावों से अलग दिखाई दे रही है। जलभराव की समस्या यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर निर्माण और जलनिकासी की योजनाओं के बावजूद बारिश का पानी सड़कों पर क्यों जमा हो रहा है। स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल एक ओर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को बुनियादी सड़क और जलनिकासी जैसी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी का मतलब केवल बड़े प्रोजेक्ट और चमकती हुई मुख्य सड़कें नहीं, बल्कि शहर की गलियों और मोहल्लों में भी सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन होना चाहिए। नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सड़कें पहले से जर्जर हैं तो उनकी समय रहते मरम्मत क्यों नहीं कराई जाती? यदि जलभराव की समस्या लगातार सामने आती है तो जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? बारिश के बाद गड्ढों में पानी भरने से हादसे की स्थिति बनने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से तैयारी क्यों नहीं की जाती?
लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर सड़क मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति कर दी जाती है। कुछ समय बाद सड़क फिर उखड़ जाती है और समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और कार्यों की निगरानी पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
हर बारिश में ‘स्विमिंग पूल’ क्यों? शहरवासियों का कहना है कि बारिश कोई अचानक आने वाली प्राकृतिक घटना नहीं है। हर साल बरसात का मौसम आता है, फिर भी जलभराव वाले स्थानों की स्थायी समस्या दूर नहीं की जाती। नतीजा यह है कि बारिश होते ही नागरिकों को जलभराव, कीचड़, गड्ढों और खराब सड़कों से जूझना पड़ता है।
अब सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन कब तक इन समस्याओं को नजरअंदाज करता रहेगा? क्या सड़कों की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था तब होगी, जब कोई बड़ा हादसा हो जाए? नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि जर्जर सड़कों का तत्काल सर्वे कराकर गड्ढों की मरम्मत, सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराई जाए। साथ ही पूर्व में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाए। स्मार्ट सिटी के दावों की असली परीक्षा चमकते प्रोजेक्टों से नहीं, बल्कि बारिश के दौरान आम नागरिक को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से होती है। यदि सड़कें हर बारिश में ‘स्विमिंग पूल’ बनती रहेंगी तो स्मार्ट सिटी के दावे खुद सवालों के घेरे में खड़े रहेंगे।