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बाकरगंज के अलम जुलूस में अश्कबार हुईं आंखें, दो मासूम बच्चों के कलाम ने भावुक किया माहौल

साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी रहे मौजूद
FATEHPUR NEWS: शहर के बाकरगंज क्षेत्र में चहल्लुम के अवसर पर करबला के शहीदों की याद में आयोजित मजलिस और अलम के जुलूस में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दिनभर चले धार्मिक आयोजन में करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। मजलिस में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 वफ़ादार साथियों की शहादत का मार्मिक बयान किया गया, जिसे सुनकर मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गम और अकीदत से भर उठा। कार्यक्रम की निज़ामत हिंदुस्तान के मशहूर निज़ामतकार रहज़र आब्दी उर्फ़ मोनू ने की। उन्होंने मजलिस की शुरुआत करते हुए मशहूर नौहाखान एवं भारतीय जनता पार्टी (अल्पसंख्यक मोर्चा) उत्तर प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी फ़ैज़ान रिज़वी को कलाम पेश करने के लिए आमंत्रित किया। फ़ैज़ान रिज़वी ने अपने दर्दभरे अंदाज़ में नौहे पेश कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। इसके बाद मशहूर नौहाखान एडवोकेट ज़ैन फतेहपुरी तथा इसरत अली ने भी करबला की शान में प्रभावशाली कलाम पेश किए, जिन्हें अज़ादारों ने बेहद अकीदत के साथ सुना। मजलिस में करबला की उस ऐतिहासिक शहादत को याद किया गया, जिसमें हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों ने इस्लाम, इंसानियत और सत्य की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। तकरीरों और कलामों के दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया तथा अज़ादारों की आंखों से अश्क छलक पड़े। मजलिस के बाद अलम का विशाल जुलूस पारंपरिक मार्गों से निकाला गया। जुलूस में काले लिबास पहने अज़ादार सीना-ज़नी और मातम करते हुए “लब्बैक या हुसैन”, “या हुसैन” और “हाय हुसैन” की सदाएं बुलंद कर रहे थे। जुलूस के मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर लोगों ने अलम का इस्तकबाल किया और करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता तनवीर हुसैन नक़वी के दो मासूम बेटे अदल और ग़ाज़ी ने करबला की शान में दर्दभरे कलाम पेश किए। दोनों बच्चों ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज़ से ऐसा समां बांधा कि मजलिस में मौजूद अज़ादार भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। उपस्थित लोगों ने दोनों बच्चों की धार्मिक लगन, अदब और प्रतिभा की सराहना करते हुए उनकी हौसला-अफज़ाई की। आयोजन फ़रहत मीर साहब की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। सुबह से देर शाम तक चले इस धार्मिक आयोजन में जनपद के साथ-साथ गैर जनपदों से आई विभिन्न अंजुमनों ने भी अपने-अपने नौहे और कलाम पेश कर करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शबरोज़ कानपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि करबला का पैगाम इंसानियत, सब्र, हक़ और इंसाफ़ की राह पर डटे रहने का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में अमन, भाईचारे और इंसानियत को मजबूत करने की अपील की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अज़ादारों, गणमान्य नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी भी आयोजन में उपस्थित रहे और उन्होंने करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।