KUSHINAGAR NEWS: जिले के पिपरा खुर्द गांव में दूषित पेयजल का संकट जानलेवा साबित हो रहा है। दूषित पानी पीने से दो बच्चों की मौत के बाद जिलाधिकारी व सीडीओ समेत प्रशासनिक अमले के दौरे और जांच के बावजूद ग्रामीण आज भी वही जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं।
जांच में खुलासा, फिर भी कार्रवाई नहीं:
जल निगम की जांच टीम ने गांव के सभी सरकारी और देसी हैंडपंपों के पानी के नमूने लिए थे। रिपोर्ट में पूरे गांव का पानी दूषित पाया गया था। इसके बाद कई हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर खतरे का संकेत दे दिया गया था। लेकिन विकल्प के अभाव में ग्रामीणों के पास उस दूषित पानी के अलावा कोई चारा नहीं है।
वाटर एटीएम खराब, पानी टंकी अधूरी:
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिला पंचायत द्वारा लगाया गया वाटर एटीएम भी महीनों से खराब पड़ा है। वहीं जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी का निर्माण कार्य भी अधर में लटका हुआ है। गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश: ‘सिर्फ दिखावा हुआ’
स्थानीय निवासी विष्णु दयाल कुशवाहा ने बताया, “बच्चों की मौत के बाद प्रशासनिक अमला तो गांव आया, लेकिन सिर्फ दिखावा हुआ। न तो पानी की व्यवस्था हुई और न ही मच्छरों के दवा का छिड़काव हुआ, जिससे बीमारी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन से मांग है कि शुद्ध पानी की व्यवस्था की जाए और मच्छरों के दवा का छिड़काव किया जाए।”
पूर्व प्रधान रविंद्र पाण्डेय का कहना है, “गांव में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मजबूर होकर देशी पंप का दूषित पानी पिया जाता है।”
मनोज शर्मा ने आशंका जताई, _”बच्चों के मौत के बाद गांव में कोई बदलाव नहीं आया और न ही दवा का छिड़काव हुआ। यहीं हाल रहा तो बच्चे फिर बीमार पड़ सकते हैं।” और फिर महामारी की आशंका जताई है।
ग्रामीणों की मांग:
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मांग की है कि गांव में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था कराई जाए, खराब वाटर एटीएम को अविलंब चालू कराया जाए और अधूरी पानी टंकी का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए,







