Home उत्तर प्रदेश दसवीं मुहर्रम पर ग़म और अकीदत के साथ सुपुर्दे-ख़ाक किए गए ताजिए

दसवीं मुहर्रम पर ग़म और अकीदत के साथ सुपुर्दे-ख़ाक किए गए ताजिए

सुल्तानपुर घोष में ‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच अज़ादारों ने किया मातम, करबला के शहीदों को पेश किया पुरसा
FATEHPUR NEWS: जनपद के सुल्तानपुर घोष गांव में दसवीं मुहर्रम (यौमे आशूरा) के अवसर पर ग़म, मातम और अकीदत के साथ ताजियों को निर्धारित समय पर करबला ले जाकर सुपुर्दे-ख़ाक किया गया। पूरे क्षेत्र में “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं और अज़ादारों ने इमाम हुसैन (अ.स.) तथा करबला के 72 शहीदों को पुरसा पेश कर उनकी कुर्बानी को याद किया। ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल हुए। मातम करते हुए ताजियों को करबला तक ले जाया गया, जहां सलातो-सलाम और दुआओं के साथ उन्हें सुपुर्दे-ख़ाक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान माहौल ग़मगीन होने के साथ-साथ श्रद्धा और अनुशासन का भी परिचायक रहा। यौमे आशूरा के अवसर पर हुसैनगंज विधायक ऊषा मौर्य भी सुल्तानपुर घोष गांव पहुंचीं। उन्होंने अंजुमन कमेटी के पदाधिकारियों के साथ करबला के शहीदों को पुरसा पेश किया तथा विभिन्न स्थानों पर आयोजित लंगर और सबील में पहुंचकर अपने हाथों से शरबत एवं शीतल पेय जल का वितरण किया। पूरे गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की सुंदर मिसाल देखने को मिली। विभिन्न समुदायों के लोगों ने ताजियों पर तिल्ली-चावल (तिल चौरी) चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कई स्थानों पर लोगों ने ताजियों के नीचे से निकलकर मन्नतें मांगीं, जबकि अनेक जगहों पर फूल-मालाओं से ताजियों का स्वागत किया गया। याद-ए-हुसैन में गांव के विभिन्न स्थानों पर लंगर और सबील का व्यापक आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं को पुलाव, शरबत, कोल्ड ड्रिंक, मिठाई, नमकीन, आइसक्रीम, खीर, खुर्मा, जलेबी, नानखटाई, बिस्किट, बालूशाही सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ वितरित किए गए। अंजुमन कमेटी सुल्तानपुर घोष के पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। निर्धारित समय पर शांतिपूर्ण वातावरण में ताजियों को करबला में सुपुर्दे-ख़ाक किए जाने के साथ मुहर्रम का आयोजन संपन्न हुआ। इसी तरह क्षेत्र के बहेरा सादात, ऐरायां, हथगाम, मोहम्मदपुर गौंती, अफोई, मंडवा, काजीपुर, शोहदमऊ (मंवई), इजूरा बुजुर्ग, अल्लीपुर, सराएं, प्रेमनगर आदि जगहों पर भी शांति के साथ मुहर्रम मनाया गया।