MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) नवासा ए रसूल कर्बला के शहीद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम एवं उनके 72 वफ़ादार साथियों की याद में मंगलवार को दोपहर 3 के बाद चेहल्लुम के मौके पर शहर में अलम और ताजिया का मातमी जुलूस बड़े ही एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस में शामिल अजादार हाथों में अलम लिए या हुसैन, या अब्बास और या सकीना की सदाएं बुलंद कर रहे थे। गम-ए-हुसैन में डूबे अजादार मातमी नौहे पढ़ते हुए अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरते रहे। जुलूस में छोटे-छोटे बच्चे भी पूरे एहतराम के साथ अलम थामे नजर आए। मासूम बच्चों को गम-ए-हुसैन में शामिल देखकर हर आंख नम हो गई। पूरे रास्ते नौहाख्वानी, मातम और या हुसैन की सदाओं से माहौल गमगीन बना रहा। कर्बला के शहीदों की याद में अजादारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों अपने अपने घरों में नज़र (फातिहा) दिलाई । शहर के तरकापुर, कुरैश नगर, रामबाग, वासलीगंज, घंटाघर, भटवा की पोखरी, पुरी कटरा, लालडिग्गी, इमलाहा तथा अन्य मोहल्लों से अलम और ताजिया के जुलूस निकाले गए। पुलिस प्रशासन की निगरानी में सभी जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होते हुए इमामबाड़ा स्थित कर्बला पहुंचकर शांतिपूर्वक संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों मौजूद रहें। शाहिद वारसी ने बताया कि कर्बला की जंग के बाद अहल-ए-बैत की महिलाओं और बच्चों को कैद कर पहले कूफा और फिर शाम ले जाया गया। हजरत जैनब सलामुल्लाह अलैहा ने हर मुश्किल और मुसीबत के बावजूद हक और सच्चाई का पैगाम बुलंद रखा। चार साल की मासूम बीबी सकीना सलामुल्लाह अलैहा की प्यास, तकलीफ और कैद की याद आज भी अजादारों की आंखें नम कर देती है। उन्होंने बताया कि मुहर्रम की 10 तारीख (यौमे-ए-आशूरा) को कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया था। मुहर्रम के चालीस दिन पूरे होने पर सफर महीने की 20 तारीख को चेहल्लुम मनाया जाता है, जिसे अरबईन भी कहा जाता है। मौलाना अबरार ने बताया कि कैद से रिहाई के बाद इमाम जैनुल आबिदीन अलैहिस्सलाम की सरपरस्ती में अहल-ए-बैत का काफिला कर्बला पहुंचा, जहां शहीदान-ए-कर्बला को पुरसा पेश किया गया। उसी याद में हर वर्ष चेहल्लुम के मौके पर दुनिया भर में अजादारी की जाती है। नफ़ीसुल रिज़वी ने कहां कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सहाबी हजरत जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी सबसे पहले कर्बला पहुंचकर हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रोजे की जियारत करने वालों में शामिल थे। इसी वजह से चेहल्लुम को अरबईन की जियारत का भी विशेष महत्व माना जाता है। वहीं शाम 7:30 बजे भैसहिया टोला स्थित मीर साहब की गली से दुल्दुल व अलम का मातमी जुलूस शिया समुदाय की ओर से भी नफ़ीसुल रिज़वी की क़ियादत में निकाल गया। जुलूस अपने कदीमी मार्गों से होता हुआ बड़ी चौक स्थित फ़तेह ख़ान के बाड़े पर ईमाम चौक के पास देर शाम पहुंचा। जहां अजादारो ने नौहा पढ़ते हुए सिनाजनी करते गए कर्बला के 72 शहीदों को खिराज ए अकीदत पेश किया।







