Home उत्तर प्रदेश चुनार थाना साइलेंट मोड में बदमाश, एक्शन मोड में पत्रकार पर हमला

चुनार थाना साइलेंट मोड में बदमाश, एक्शन मोड में पत्रकार पर हमला

पत्रकार ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

MIRZAPUR NEWS: जनपद में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। चुनार थाना क्षेत्र के निवासी पत्रकार विरेन्द्र कुमार सिंह उर्फ विचित्रानंद ने पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उन पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन मदद के लिए किए गए फोन कॉल तक थाना प्रभारी ने रिसीव नहीं किए। पीड़ित पत्रकार के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 की रात करीब 9:15 बजे वह एक शादी समारोह से लौटकर अपने घर पहुंचे ही थे कि घर के सामने सड़क किनारे पहले से घात लगाए बैठे दो नकाबपोश हमलावरों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने उनके साथ मारपीट की और मोबाइल व अन्य सामान छीनने का भी प्रयास किया। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी दहशत में आ गए। पत्रकार का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने सहायता के लिए चुनार थाना प्रभारी को लगातार 3 से 4 बार फोन किया, लेकिन किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया गया। आरोप है कि जब थाना स्तर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो मजबूर होकर उन्होंने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी। सवाल यह उठ रहा है कि जब एक पत्रकार की आपातकालीन कॉल तक नहीं उठी, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। पीड़ित ने अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अगले दिन जब उन्होंने थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी, तो कार्रवाई करने के बजाय उन पर समझौते का दबाव बनाया जाने लगा। इतना ही नहीं, बिना ठोस जांच और तथ्यों की पड़ताल किए मामले को जल्दबाजी में निपटाने की कोशिश की गई। इससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि घटना में शामिल हमलावरों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए, आरोपियों की गिरफ्तारी कर कठोर कार्रवाई की जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही थाना प्रभारी की कथित लापरवाही, फोन न उठाने, शिकायत को गंभीरता से न लेने और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप में विभागीय कार्रवाई की भी मांग की गई है। इस घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि संकट की घड़ी में थाना फोन न उठाए, शिकायतकर्ता पर समझौते का दबाव बने और अपराधी खुलेआम घूमते रहें, तो कानून-व्यवस्था पर जनता कैसे भरोसा करे। अब निगाहें पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर टिकी हैं कि पीड़ित पत्रकार को न्याय मिलेगा या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल चुनार पुलिस की कार्यप्रणाली पूरे इलाके में चर्चा और आलोचना का विषय बनी हुई है।