मामले पर एसडीएम अनामिका श्रीवास्तव हुईं सख्त, जांच करवाकर कार्यवाही की कही बात
FATEHPUR NEWS: सदर तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम बेरा गढ़ीवा में सरकारी खलिहान की भूमि पर दोबारा अतिक्रमण किए जाने की तैयारी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले से हुए कब्जे के बाद अब मिट्टी डालकर अतिक्रमण को और आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गाटा संख्या 1341 (ग), रकबा 0.6820 हेक्टेयर के खलिहान की भूमि के एक हिस्से पर पहले से अवैध कब्जा किया जा चुका है। अब उसी भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जे का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है। आरोप है कि गांव निवासी अरुण कुमार पुत्र कृष्ण बिहारी द्वारा खलिहान की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है और अब आगे भी निर्माण की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब राजस्व विभाग की कथित मिलीभगत और संरक्षण में हो रहा है। उन्होंने संबंधित हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी शह पर सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। वहीं तहसीलदार और नायब तहसीलदार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत कार्य कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब मामला स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि से जुड़ा है तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67(1) के तहत अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों ने भूमि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अब देखना होगा कि प्रशासन अवैध अतिक्रमण हटाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस पूरे मामले में उपजिलाधिकारी सदर अनामिका श्रीवास्तव का कहना रहा है कि मामला अब संज्ञान में आया है जिसकी जाँच करवा लेती हूँ और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण नहीं करने दिया जायेगा और ऐसा करने वाले और करवाने वालों पर भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
तालाब की भूमि पर भी अतिक्रमण का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में स्थित गाटा संख्या 1430, रकबा 0.6150 हेक्टेयर (तालाब की भूमि) पर भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। उनके अनुसार कुछ लोगों के विरुद्ध न्यायालय से बेदखली एवं जुर्माने के आदेश हुए हैं, जबकि कई अन्य कथित कब्जाधारियों को कार्रवाई से बाहर रखा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी मुकदमे में शामिल किए गए जिनका कब्जा नहीं था, जबकि वास्तविक कब्जाधारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं कब्जाधारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग जिलाधिकारी से की है।







