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कोटा आवंटन में अनियमितता का आरोप, जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

FATEHPUR NEWS: असोथर विकास खंड की ग्राम पंचायत सरवल में उचित दर की दुकान (कोटा) के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्राम निवासी सोमेश्वर पुत्र शिवशरण ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर कोटा चयन प्रक्रिया में अनियमितता एवं नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने तथा उन्हें नियमानुसार उचित दर विक्रेता का प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत सरवल में उचित दर विक्रेता के चयन के लिए 16 मई एवं 25 मई 2026 को ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित की गई थी। इन बैठकों में उपस्थित ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से उनके पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया। इसके आधार पर उपजिलाधिकारी सदर ने 6 जून 2026 को उनके नाम से कोटा आवंटन का आदेश भी जारी कर दिया था। सोमेश्वर का आरोप है कि इसके बाद पूरी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए 6 जुलाई 2026 को एक नया आदेश जारी किया गया, जिसमें एक महिला अभ्यर्थी को अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी का दर्शाया गया। उनका कहना है कि इससे पूर्व 3 जून एवं 10 जून 2026 को जारी अभिलेखों और आदेशों में संबंधित महिला अभ्यर्थी को आरक्षित श्रेणी में प्रदर्शित किया गया था। ऐसे में बाद में उसकी श्रेणी में परिवर्तन कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जो नियमों के विपरीत है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही ग्राम सभा की कार्यवाही, सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव तथा पूर्व में जारी आदेशों के आधार पर उन्हें उचित दर विक्रेता का प्रमाण पत्र जारी किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सोमेश्वर ने अपने शिकायती पत्र के साथ ग्राम सभा की कार्यवाही रजिस्टर की प्रतिलिपि, उपजिलाधिकारी द्वारा जारी आदेशों सहित अन्य संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध अभिलेख पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं और निष्पक्ष जांच होने पर सत्य सामने आ जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी स्तर पर होने वाली जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।