15वाँ राज्य वित्त आयोग से 630 मीटर नाली निर्माण के लिए वर्ष 2023-24 में 32 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत है।
वार्ड न0-12 वीर अब्दुल हमीद नगर में प्रमोद तिवारी के घर से विक्की श्रीवास्तव के घर तक बोर्ड पर निर्माण कार्य अंकित है।
KUSHINAGAR NEWS: जिले में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के ऐसे-ऐसे नायाब नमूने सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि कुशीनगर नगर पालिका परिषद के जिम्मेदारों के लिए जनता के गाढ़े पसीने की कमाई सिर्फ अपनी जेबें भरने का जरिया बन चुकी है। मामला नगर पालिका के वार्ड नंबर-12 वीर अब्दुल हमीद नगर का है, जहां कागजों पर तो विकास की लंबी लकीरें खींच दी गईं, लेकिन धरातल पर सिर्फ नगर वासियों की आंखों में धूल झोंकी गई। 15वें राज्य वित्त आयोग की भारी-भरकम धनराशि से बनने वाली आरसीसी नाली का निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। गंभीर बात तो यह है कि बिना काम पूरा हुए ही इस निर्माण को लोकहित में अर्पण यानी ‘लोकार्पण’ भी नगर प्रशासन द्वारा बड़े तामझाम के साथ कर दिया गया।
शिलापट से गायब हैं स्वीकृत धनराशि, दूरी और समय सीमा के आंकड़े
इस पूरे खेल की सबसे बड़ी बानगी यह है कि निर्माण स्थल पर लगाए गए शिलापट यानी लोकार्पण बोर्ड पर भी गोलमाल की पूरी दास्तान साफ झलकती है। कायदे के मुताबिक, किसी भी सरकारी योजना के बोर्ड पर स्वीकृत धनराशि, निर्माण कार्य की कुल दूरी/क्षेत्रफल और कार्य पूर्ण होने की समय सीमा का स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य है, ताकि आम जनता को यह पता चल सके कि उनके इलाके में कितना बजट खर्च हो रहा है और काम कब तक पूरा होना है।
लेकिन वीर अब्दुल हमीद नगर में लगे बोर्ड पर इन जरूरी आंकड़ों और समयावधि को शातिर तरीके से गायब कर दिया गया है। बोर्ड पर सिर्फ सीएम से लेकर सभासद मधुबाला तक, केवल जनप्रतिनिधियों के नाम और 15वें राज्य वित्त आयोग के तहत ‘प्रमोद तिवारी के घर से विक्की श्रीवास्तव के घर तक आरसीसी नाली निर्माण’ का सतही उल्लेख भर कर दिया गया है। आंकड़ों और समय सीमा को छुपाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गहरी बू आ रही है।
32 लाख का बजट, 630 मीटर का दावा, धरातल पर सिर्फ अधूरा निर्माण
मामले की तह में जाएं तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इस वार्ड में प्रमोद तिवारी के घर से विक्की श्रीवास्तव के घर तक 630 मीटर आरसीसी नाली का निर्माण कराया जाना था, जिसके लिए पूरे 32 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। हैरानी की बात यह है कि ठेकेदार और नगर प्रशासन की कथित मिलीभगत के चलते, निर्धारित लक्ष्य का केवल आधा हिस्सा ही धरातल पर उतारा गया और बाकी का बड़ा हिस्सा आज भी भगवान भरोसे अधूरा पड़ा है। जनता के विकास के नाम पर आया लाखों रुपया कहां हवा हो गया, इसका जवाब देने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने आने को तैयार नहीं है।
दो साल से अधूरा है निर्माण, शिकायतों पर भी अध्यक्ष और ईओ ने साधी चुप्पी
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस नाली का निर्माण कार्य आज से दो साल बीत जाने के बाद भी आधा-अधूरा और बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है, उसका लोकार्पण आखिर किस मुंह से कर दिया गया? क्या उद्घाटन सिर्फ कागजों पर वाहवाही लूटने और सरकारी धन के बंदरबांट को अंतिम रूप देने का एक ढकोसला था?
वार्डवासियों ने इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर कई बार मौखिक रूप से नगरपालिका अध्यक्ष किरन जायसवाल और अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला से बार-बार शिकायत की। उन्होंने निर्माण में हो रही अनियमितताओं को लेकर जिम्मेदारों के दरवाजे खटखटाए और गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद नगर अध्यक्ष व ईओ ने कभी भी मौके का निरीक्षण करने की जहमत तक नहीं उठाई। कुंभकर्णी नींद सोए नगर प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदकर बैठे रहे और जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर होती रही।
डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग
अधूरे निर्माण, गायब आंकड़ों, तय समय सीमा का जिक्र न होने, बोर्ड पर लिखे प्रमोद तिवारी के घर से विक्की श्रीवास्तव के घर तक निर्माण पूरा नहीं होने और लाखों के इस खेल से आजिज आ चुके वार्डवासियों ने अब हार न मानते हुए जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वार्डवासियों का कहना है कि इस मामले में लिप्त भ्रष्ट ठेकेदार और साठगांठ करने वाले नगर पालिका के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को पूर्ण कराया जाए, ताकि प्रदेश की योगी सरकार का भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की सुचिता कायम रह सके। बहरहाल, यह मामला कुशीनगर नगर पालिका के कामकाज की पोल खोलने के लिए काफी है। यह सिर्फ एक नाली निर्माण में भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह टैक्स देने वाली जनता के भरोसे की खुल्लम-खुल्ला चीरफाड़ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस सनसनीखेज मामले में क्या एक्शन लेता है, या फिर फाइलों के शोर में जनता की यह आवाज भी दबा दी जाएगी।
अधिशासी अधिकारी बोली:
अधूरे निर्माण की पूरी जानकारी देते हुए अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला से उनका पक्ष जाना गया तो उन्होंने कहा कि इसे दिखवाती हूं, और फोन काट दिया गया। हालांकि इससे पूर्ण कई बार इस अधूरे निर्माण की शिकायत की जा चुकी है।







