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आवाज़ दबाने की साजिश या कानून का डर? हाउस अरेस्ट पर भड़के पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी

सत्ता बनाम सच: हाउस अरेस्ट पर सियासी भूचाल
KUSHINAGAR NEWS:  पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को हाउस अरेस्ट किए जाने की कार्रवाई ने जनपद की राजनीतिक तापमान को बढा ला दिया है। इस कार्रवाई के बाद श्री त्रिपाठी ने तीखा और बेबाक हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति को रोकने की कोशिश नहीं, बल्कि सच बोलने वालों की आवाज कुचलने की सुनियोजित साजिश है। कहना ना होगा कि जिले की सियासत उस वक्त गरमा गई जब सपा के पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को सपाइयो ने  लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा निर्दोष जनता की आवाज को दबाने की साजिश रची जा रही है और यह कदम उसी कड़ी का हिस्सा है।पूर्व मंत्री त्रिपाठी ने हाउस अरेस्ट को सीधे-सीधे “अधिनायकवाद की शुरुआत” करार देते हुए कहा कि जब सरकारें सवालों से डरने लगती हैं, तब वे संवाद नहीं, दमन का रास्ता चुनती हैं। “लोकतंत्र में हर नागरिक को अन्याय के खिलाफ बोलने का अधिकार है, लेकिन आज उस अधिकार को ही अपराध बना दिया गया है। ” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की यह कार्रवाई डर पैदा करने की राजनीति का हिस्सा है, ताकि आम जनता खामोश रहे और सत्ता से सवाल न करे। उन्होंने कहा कि मुझे घर में रोककर वे समझते हैं कि आवाज दब जाएगी, लेकिन सच को न तो कैद नहीं किया जा सकता है और ही दबाया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सरकार व प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। वहीं, आम जनता के बीच भी यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा बैठाया जा रहा है?