कसया सीएचसी पहुँची टीम ने कमियों को सुधारने के बजाय कागज़ों पर दुरुस्त करने की दी सलाह।
केंद्रीय टीम के खौफ से जागा स्वास्थ्य महकमा: ड्रेस कोड में नहीं दिखे डॉक्टर, औपचारिकता पूरी कर लौटी जांच टीम
एक साल पुरानी कमियां छिपाने की जुगत में जुटी रही उच्चस्तरीय KUSHINAGAR NEWS: जिले के स्वास्थ्य महकमे में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य टीम के संभावित दौरे की भनक लगते ही महकमे के अधिकारी व्यवस्थाओं को उच्चस्तरीय दिखने को लेकर लीपापोती में जुट गए हैं। ताजा मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसया का है, जहां गुरुवार को जांच के नाम पर पहुंची दो सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम महज औपचारिकता पूरी कर लौट गई। हैरान करने वाली बात यह है कि टीम ने गंभीर कमियों पर सख्त रुख अपनाने व कार्रवाई करने के बजाय एक वर्ष पूर्व हुई जांच रिपोर्ट की खामियों को कागज पर दुरुस्त करने की अनूठी सलाह अधिक्षक कार्यालय में बैठकर खातिरदारी के दौरान दे दी।
ड्रेस कोड से लेकर कार्यशैली तक पर उठ रहे सवाल
केंद्रीय जांच टीम के संभावित आगामी आगमन की आहट मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की नींद उड़ गई है। इसी क्रम में स्टेट और मंडली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के नाम पर कसया सीएचसी पहुंचे थे। हकीकत यह है कि सामान्य दिनों में कसया सीएचसी की तस्वीर इसके उलट रहती है। यहां तैनात अधिकांश डॉक्टर ड्यूटी ऑवर्स के दौरान लोवर और टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक पहनावे में ही नजर आते हैं। हालात यह होते हैं कि मरीजों को पहचानना में मुश्किल हो जाता है कि इलाज करने वाला शख्स डॉक्टर है या कोई अन्य कर्मी। हालांकि, जांच टीम के आने की सूचना मिलते ही अधीक्षक से लेकर सभी डॉक्टर और कर्मचारी अचानक मुस्तैद नजर आए, लेकिन फॉर्मल ड्रेस में ही दिखाई दिए।
घंटों इंतजार और कागजी औपचारिकताओं का दौर
सूत्रों के मुताबिक, दो सदस्यीय एसआरएम टीम के सदस्य दुर्गा प्रताप सिंह निर्धारित समय से करीब एक घंटा पहले ही कसया सीएचसी पहुंच गए थे। वह सीधे अधीक्षक कक्ष में पहुंचे और एसीएमओ मऊ डॉ. बीके यादव का इंतजार करने लगे। जब इसकी भनक सीएचसी अधीक्षक डॉ. मार्कण्डेय चतुर्वेदी को लगी, तो उन्होंने आनन-फानन में मातहतों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए और डाक्टर कोड ड्रेस छोड़ खुद फॉर्मल ड्रेस में सुसज्जित होकर अपने कार्यालय पहुंचे, जहां दुर्गा प्रताप सिंह पहले से मौजूद थे। लगभग एक घंटे बाद एसीएमओ डॉ. बीके यादव भी वहां पहुंच गए। दोनों अधिकारियों ने अधीक्षक कक्ष में लंबी बैठक की और जमकर ‘खातिरदारी’ का आनंद लिया।
कागजों पर सुधारी गईं कमियां, दिए गए निर्देश
खातिरदारी का दौर पूरा होने के बाद टीम ने ओपीडी, इमरजेंसी कक्ष, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर (ओटी), महिला वार्ड, दवा स्टोर रूम और कार्यालय के अभिलेखों का सतही अवलोकन किया। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में बिजली, पंखा और जनरेटर जैसी व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। टीम ने जाते-जाते ओपीडी और इमरजेंसी कक्ष में दो नई शिकायती पेटिकाएं लगवाने तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने का निर्देश दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक साल पहले दिल्ली से आई केंद्रीय स्वास्थ्य टीम द्वारा पकड़ी गई गंभीर कमियों को दूर करने की बजाय, आज के निरीक्षकों ने केवल पुरानी रिपोर्ट की कमियों को कागजों पर ही दुरुस्त करने की नसीहत देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
केंद्रीय जांच के खौफ से सक्रिय हुआ महकमा
जानकारों का कहना है कि लगभग एक वर्ष पूर्व दिल्ली से आई केंद्रीय स्वास्थ्य टीम ने कसया सीएचसी का निरीक्षण किया था, जिसके दौरान कई गंभीर खामियां उजागर हुई थीं। अब एक बार फिर केंद्रीय टीम के आने की आशंका को भांपते हुए स्टेट और मंडली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खुद फील्ड में उतरकर कमियों को छिपाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। इस पूरे निरीक्षण के दौरान सीएचसी अधीक्षक डॉ. मार्कण्डेय चतुर्वेदी, डॉ. संजय सिंह, डॉ. आशुतोष पाण्डेय सहित अस्पताल के तमाम डॉक्टर और कर्मचारी मौजूद रहे। बहरहाल, इस औपचारिकता भरे निरीक्षण ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।







