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शोहरतगढ़ के सियासी समर में नया मोड़: युवा तेजतर्रार नेता नौशाद आलम बने असपा के विधानसभा प्रभारी

दलित-मुस्लिम-पिछड़ा  समीकरण साधने की तैयारी; नियुक्ति के बाद कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई, 2027 में जीत की बढ़ी प्रबल संभावना
SIDHARTHNAGAR NEWS: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की 302 शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी 2027 के आम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद के निर्देश एवं प्रदेश कमेटी की संस्तुति पर विकास खंड बढ़नी के ग्राम टीसम निवासी युवा तेजतर्रार नेता नौशाद आलम को शोहरतगढ़ का नया विधानसभा प्रभारी नियुक्त किया गया है। नियुक्ति की खबर मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह छा गया। इस दौरान जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती, मंगेश यादव, फूलचंद गौतम, आशाराम शर्मा, इम्तियाज अहमद, मासूम अली राईनी व पप्पू प्रसाद सहित दर्जनों पदाधिकारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई।
भौगोलिक व ऐतिहासिक रूप से बेहद खास मानी जाने वाली यह सीट बुद्ध परिपथ, राष्ट्रीय राजमार्ग 730 और भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटी हुई है। राजा शोहरत सिंह और राजा शिवपति सिंह की विकासवादी सोच तथा ‘शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय’ जैसी शैक्षणिक धरोहरों को समेटे इस अंचल की लगभग 95 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है। नेपाल सीमा से लगे इस इलाके में आज भी बाढ़ नियंत्रण, कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। वर्ष 2008 के नए परिसीमन के तहत अस्तित्व में आई ‘विधानसभा सीट संख्या 302’ का इतिहास रहा है कि मतदाताओं ने हमेशा बदलाव को ही प्राथमिकता दी है। 2012 में सपा की लालमुन्नी सिंह लगभग 5 हजार वोटों के अंतर से चुनी गईं, वहीं 2017 में अमर सिंह चौधरी और 2022 में विनय वर्मा (अपना दल एस) ने क्रमशः लगभग 22 हजार और 24.5 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2022 के चुनाव में आजाद समाज पार्टी ने लगभग 13 हजार (13,080) वोट हासिल कर पहली बार क्षेत्र में अपनी मजबूत धमक दिखाई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीसम गाँव के साधारण परिवार से निकलकर धरातल पर संघर्ष करने वाले युवा नेता नौशाद आलम की नियुक्ति पार्टी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। वातानुकूलित दफ्तरों के बजाय ग्रामीण पगडंडियों और टोले-मजरों में आम जनता के सुख-दुख में लगातार शरीक रहने की शैली ने उन्हें क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय बना दिया है। शोहरतगढ़ के सामाजिक समीकरण में दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में नौशाद आलम को कमान मिलने के बाद क्षेत्र में दलित-मुस्लिम-पिछड़ा गठजोड़ बेहद मजबूत होता दिख रहा है।
सांसद चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते राजनीतिक कद और शोषितों के हक में उठ रही आवाज के बीच, नौशाद आलम की जमीनी पकड़ से 2027 के चुनाव में उनकी और आजाद समाज पार्टी (भी) के जीत की संभावना सबसे प्रबल मानी जा रही है। जनसंपर्क के दौरान ग्रामीण जनता और युवाओं के बीच दिख रहा भारी उत्साह इस बात का साफ संकेत दे रहा है कि इस बार शोहरतगढ़ की जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों को किनारे कर एक नए और अपने बीच के जमीनी विकल्प पर दांव लगाने का मन बना चुकी है।