56 बच्चों का हुआ स्वास्थ्य एवं दिव्यांगता परीक्षण, विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने की जांच; प्रमाण पत्र से योजनाओं का मिलेगा लाभ
KAUSHAMBI NEWS: समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा के तत्वावधान में मंगलवार को ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) कौशांबी में परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मेडिकल असेसमेंट कैंप आयोजित किया गया। शिविर में मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बच्चों का स्वास्थ्य एवं दिव्यांगता परीक्षण किया। परीक्षण के बाद पात्र पाए गए 26 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। कैंप का आयोजन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेन्द्र कुमार कुशवाहा के निर्देशन तथा खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार सिंह और जिला समन्वयक समेकित शिक्षा अवधेश कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में बच्चों की दिव्यांगता की स्थिति का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण किया गया और आवश्यक अभिलेखों की जांच के बाद पात्र बच्चों को प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. ब्रह्मा शुक्ला, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत यादव, साइकोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कोटार्य, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी, ऑडियोलॉजिस्ट डॉ. संकल्प शुक्ला, मनोचिकित्सक डॉ. नितेश सिंह तथा ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ. फलक पाण्डेय शामिल रहे। चिकित्सकों ने बच्चों की अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार परीक्षण कर उनकी दिव्यांगता का आकलन किया। शिविर में कुल 56 दिव्यांग बच्चों ने प्रतिभाग किया। इनमें छह मूक-बधिर, 12 दृष्टिबाधित, 26 मानसिक दिव्यांगता तथा 12 अस्थि दिव्यांगता वाले बच्चे शामिल रहे। परीक्षण एवं आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 26 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। शिविर को सफल बनाने में बीआरसी कौशांबी के स्पेशल एजुकेटर आशुतोष श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह और प्रदीप कुमार के साथ राम बहादुर कुशवाहा, पुष्पेंद्र सिंह, शारदा कुमार सिंह, वशिष्ठ नारायण शुक्ला तथा फिजियोथैरेपिस्ट पंकज साहू का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कर्मचारियों ने बच्चों और उनके अभिभावकों को परीक्षण प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग प्रदान किया। अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल असेसमेंट कैंप का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को आवश्यक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शासन की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं, सुविधाओं और शैक्षिक सहायता का लाभ आसानी से मिल सके। प्रमाण पत्र मिलने से बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी सहूलियत होगी। इस तरह के शिविर समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।







