Home उत्तर प्रदेश बढ़नी में सड़कों पर ‘अवैध पार्किंग’ का कब्जा, सिस्टम लाचार

बढ़नी में सड़कों पर ‘अवैध पार्किंग’ का कब्जा, सिस्टम लाचार

पटरियों को पार्किंग बना छोड़ जाते हैं ट्रक, एम्बुलेंस और मरीजों की अटकी सांसें

SIDHARTHNAGAR NEWS: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित व्यापारिक कस्बे बढ़नी की लाइफलाइन कहा जाने वाला एनएच-730 अब ‘अवैध पार्किंग’ का अड्डा बन चुका है। नेपाल जाने वाले मालवाहक ट्रकों के चालकों ने हाईवे की पटरियों को अपनी निजी संपत्ति समझकर वहां कब्जा कर लिया है। सड़क के दोनों किनारों पर बेतरतीब खड़े ये वाहन न केवल यातायात को बाधित कर रहे हैं, बल्कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को बेहद संकरा बना चुके हैं। सोमवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पेट्रोल पंप से राप्ती नहर पुल और बॉर्डर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और घंटों तक राहगीर इस जाम के झाम में कराहते रहे। जाम का सबसे दुखद पहलू मानवता के लिए संकट पैदा करना है। सड़क के दोनों ओर ट्रकों के अवैध जमावड़े के कारण रास्ता इतना संकरा हो गया है कि जीवनदायिनी एम्बुलेंस भी इसमें घंटों फंसी रह रही हैं। एम्बुलेंस में तड़पते मरीज और उनके तीमारदार बेबस होकर सड़क खाली होने का इंतजार करते हैं, लेकिन बेतरतीब खड़े वाहन रास्ता देने की गुंजाइश ही नहीं छोड़ते। मालगोदाम रोड से इंडो-नेपाल बॉर्डर तक का सफर अब किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है, जहां पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो चुका है। ट्रक चालकों की मनमानी का आलम यह है कि वे कस्टम क्लीयरेंस और अन्य कागजी औपचारिकताओं में होने वाली देरी के दौरान गाड़ियों को सड़क की पटरियों पर ही खड़ा कर गायब हो जाते हैं। इन लावारिस खड़े ट्रकों की वजह से जब पीछे से आने वाले वाहनों का दबाव बढ़ता है, तो पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। पुलिस बल को घंटों मशक्कत कर जाम खुलवाना पड़ता है, लेकिन यह राहत केवल कुछ समय की होती है। जैसे ही पुलिस हटती है, चालक फिर से अपनी गाड़ियों को हाईवे के किनारों पर खड़ा कर देते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का मानना है कि इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान कस्बे के बाहर एक विशाल पार्किंग जोन’ का निर्माण है। नेपाल जाने वाले जिन ट्रकों का कस्टम क्लीयरेंस नहीं हो पाता, उन्हें अनिवार्य रूप से इस पार्किंग जोन में भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए। जब तक ट्रकों को हाईवे से हटाकर एक निश्चित स्थान पर खड़ा नहीं किया जाएगा, तब तक सड़कों को संकरा होने से बचाना नामुमकिन है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल जमीन चिन्हित कर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराए ताकि मुख्य मार्ग का दबाव कम हो सके। महज पार्किंग जोन बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी समय की मांग है। जो चालक सड़क की पटरियों को पार्किंग के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उनके खिलाफ भारी जुर्माना और वाहनों को सीज करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय जनता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कागजी खानापूर्ति के बजाय धरातल पर उतरकर अवैध पार्किंग को हटवाया जाए। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अव्यवस्था कभी भी किसी बड़े हादसे या किसी मरीज की जान जाने का कारण बन सकती है।