नगर पंचायत चेयरमैन नीरज सिंह सेंगर के नेतृत्व में हुआ भव्य स्वागत
FATEHPUR NEWS: श्रावण मास के प्रथम सोमवार को शिवभक्ति और आस्था का अनुपम दृश्य उस समय देखने को मिला, जब ओम घाट भिटौरा से पवित्र गंगाजल लेकर लौटे कांवड़ियों का नगर पंचायत असोथर में श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। पुष्पवर्षा, शंखनाद और “हर-हर महादेव” तथा “बोल बम” के गगनभेदी जयघोष से पूरा कस्बा शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों का अभिनंदन करते हुए उनकी धार्मिक यात्रा का सम्मान किया। नगर पंचायत असोथर के शिवभक्त 2 अगस्त को परंपरागत कांवड़ यात्रा के तहत ओम घाट भिटौरा से पवित्र गंगाजल लेने के लिए रवाना हुए थे। कठिन पदयात्रा पूरी करने के बाद सोमवार प्रातः लगभग छह बजे कांवड़िए असोथर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने सिद्धपीठ मोटे महादेव मंदिर में पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर शिवभक्तों ने भगवान आशुतोष से जनकल्याण, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों के स्वागत के लिए नगर पंचायत में विशेष तैयारियां की गई थीं। नगर पंचायत चेयरमैन नीरज सिंह सेंगर के नेतृत्व में सभासद प्रवीण कुमार अग्रहरि एवं आशीष अग्रहरि सहित नगरवासियों ने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका आत्मीय स्वागत किया। साथ ही श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर और जयघोष के बीच अभिनंदन किया गया। पूरे मार्ग पर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस दौरान “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों की सेवा कर जलपान की व्यवस्था भी की और उनकी कठिन धार्मिक यात्रा की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि पवित्र गंगा से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही आस्था और विश्वास हर वर्ष हजारों शिवभक्तों को कांवड़ यात्रा के लिए प्रेरित करता है। असोथर में कांवड़ियों के सम्मान और स्वागत का यह दृश्य न केवल शिवभक्ति की गहरी भावना का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक सौहार्द, धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा का भी प्रेरक उदाहरण साबित हुआ। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, सेवा और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने श्रावण मास के पावन वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।







