SIDHARTHNAGAR NEWS: नगर पंचायत बढ़नी कहने को तो नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहाँ के निवासियों और व्यापारियों पर विद्युत विभाग द्वारा नगरीय दरों के हिसाब से भारी-भरकम बिजली बिल का बोझ डाला जाता है। कस्बे में घरेलू और व्यावसायिक (कमर्शियल) श्रेणी के कई हजार कनेक्शन मौजूद हैं, जिनसे विद्युत विभाग को हर महीने सिर्फ बढ़नी कस्बे से ही लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक योगदान देने के बावजूद उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं और सुरक्षा दांव पर लगी हुई हैं। विद्युत विभाग की घोर लापरवाही और शिथिलता के कारण पूरे कस्बे में बिजली आपूर्ति का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है और उपभोक्ता जर्जर तारों के भरोसे रहने को मजबूर हैं। कस्बे के ज्यादातर खंभों पर खींचे गए विद्युत तार अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं और अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुँच गए हैं। विभाग की कार्यशैली का आलम यह है कि एक पोल से दूसरे पोल के बीच बिछे तारों में दर्जनों जगह जोड़ लगाकर किसी तरह सप्लाई चालू रखी जा रही है। विशेष रूप से नगर पंचायत बढ़नी के वार्ड संख्या 1 और 2 में जर्जर तारों के टूटकर गिरने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। जब भी तार टूटता है, तो मोहल्लेवासी इसकी सूचना विभागीय कर्मियों को देते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने के बजाय केवल उसी पुराने तार को दोबारा जोड़कर आपूर्ति बहाल करने की तात्कालिक औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।
समस्या केवल अंदरूनी मोहल्लों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-730) पर पेट्रोल पंप से लेकर धर्मकांटा के आगे तक सड़क किनारे दौड़ाई गई विद्युत सप्लाई लाइन पूरी तरह ‘राम भरोसे’ टिकी हुई है। इस मुख्य मार्ग पर हवा का हल्का सा झोंका या मामूली आंधी-तूफान आते ही जर्जर तार टूटकर सीधे सड़क पर आ गिरते हैं। पूर्व में भी सड़क किनारे खड़ी नेपाल जाने वाली मालवाहक गाड़ियों पर ये विद्युत तार एक-दो बार गिर चुके हैं। सौभाग्यवश उस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन यदि चलती सप्लाई (चालू लाइन) के दौरान यह जर्जर तार किसी यात्री, राहगीर या पेट्रोल से भरे वाहन पर गिर जाएं, तो भीषण तबाही से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय निवासियों और व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि विद्युत विभाग की इस उदासीनता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि का इंतजार कर रहे हों। यदि समय रहते कस्बे के सभी जर्जर तारों को प्राथमिकता के आधार पर नहीं बदला गया, तो किसी भी दिन कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है, जिसकी पूरी प्रशासनिक व कानूनी जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी। नगरवासियों ने जिलाधिकारी एवं विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर समूचे कस्बे में नए और मजबूत तार बिछाए जाएं।







