कर्बला के शहीदों की याद में अकीदतमंदों ने की नियाज-फातिहा, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस रही मुस्तैद
PRAYAGRAJ NEWS: मुहर्रम की नौवीं तारीख तासुआ और दसवीं तारीख आशूरा के मौके पर खीरी क्षेत्र में गम और अकीदत का माहौल देखने को मिला। कर्बला के शहीदों की याद में मदारीपुरवा और तुर्कपुरवा स्थित चैकों पर रखी गई ताजियों पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे और नियाज-फातिहा कर इमाम हुसैन व उनके साथियों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। इस दौरान जगह-जगह “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं और लोगों ने मातम कर कर्बला की शहादत को याद किया। मान्यताओं के अनुसार मुहर्रम की नौवीं तारीख तासुआ के दिन कर्बला में इमाम हुसैन के खेमों को यजीद की सेना ने घेर लिया था। पानी की कमी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर अडिग रहने का संकल्प लिया। वहीं दसवीं मुहर्रम यानी आशूरा के दिन कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई, जिसे इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दिए गए महान बलिदान के रूप में याद किया जाता है। खीरी ग्राम पंचायत के मदारीपुरवा स्थित चैक पर इमाम हसन की ताजिया और तुर्कपुरवा स्थित चैक पर इमाम हुसैन की ताजिया रखी गई थी। जहां अकीदतमंदों ने पहुंचकर फातिहा पढ़ी और दुआएं मांगीं। तासुआ की रात करीब 11 बजे तुर्कपुरवा चैक से छोटी ताजिया जुलूस की शक्ल में निकाली गई, जो कस्बे के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य मार्ग के रास्ते मदारीपुरवा पहुंची। यहां बड़ी ताजिया के चैक पर दोनों ताजियों का मिलाप कराया गया। जुलूस के दौरान जगह-जगह सबील, लंगर और नियाज का आयोजन किया गया। ढोल-नगाड़ों की धुन पर युवाओं द्वारा किए गए करतब लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। आशूरा के दिन 26 जून को दोपहर करीब दो बजे मदारीपुरवा चैक से बड़ी ताजिया और तुर्कपुरवा चैक से छोटी ताजिया जुलूस के रूप में कर्बला के लिए रवाना हुईं। कर्बला स्थल पर दोनों ताजियों का मिलाप कराया गया, जिसके बाद शाम करीब 6रू30 बजे ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जुलूस के दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण मोहन सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। ग्राम प्रधान मो. यूसुफ सहित क्षेत्र के हजारों अकीदतमंद और ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल हुए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए खीरी पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पुलिस कर्मियों ने पूरे जुलूस मार्ग पर निगरानी बनाए रखी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। आशूरा का दिन मुस्लिम समाज में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। शिया और सूफी समुदाय के लोग इस दिन कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस और मातम करते हैं, जबकि कई सुन्नी समुदाय के लोग रोजा रखकर इबादत करते हैं। इस मौके पर लोगों ने अमन, भाईचारे और शांति की दुआ मांगी।
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