उलमा ने कहा—रसूल की मोहब्बत का तकाजा है सुन्नतों पर अमल और इंसानियत की खिदमत
PRAYAGRAJ NEWS: कसारी-मसारी स्थित हाजरा मस्जिद, चकिया रोड पर जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के सिलसिले में एक रूहानी जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में उलमा-ए-किराम ने अपनी तकरीर में कहा कि रबीउल अव्वल के मुबारक महीने में किसी ने ईद मिलाद मनाया, किसी ने बारह वफात, किसी ने जुलूस निकाला तो किसी ने सीरतुन्नबी के प्रोग्राम कराए। किसी ने मेडिकल कैंप लगाया, किसी ने रोजा रखा और किसी ने लंगर व दावत का इंतजाम किया। उलमा ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि इन तमाम तरीकों के बीच इंसानियत और हुजूर-ए-अकरम की तालीमात को अपनी जिंदगी में उतारने पर कम ही गौर किया जाता है। हमें यह समझना होगा कि अल्लाह तआला ने रसूल-ए-अकरम हजरत मोहम्मद को इंसानों की रहनुमाई और उन्हें नेक रास्ता दिखाने के लिए भेजा। उन्होंने कहा कि हुजूर के बताए रास्ते पर चलकर ही दोनों जहां की कामयाबी हासिल की जा सकती है। नमाज की पाबंदी, कुरआन-ए-करीम की तिलावत, उसकी आयतों के मायने समझना और सुन्नत-ए-रसूल पर अमल करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। जलसे में बच्चों ने नात-ए-पाक पेश की और कुरआन-ए-करीम की आयतों की तिलावत की। यह रूहानी सिलसिला देर रात तक जारी रहा। आखिर में कौम की सलामती, मुल्क में अमन-ओ-अमान और नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए खास दुआ-ए-खैर की गई। नात-ओ-सलाम पेश करने के बाद जलसे का इख्तिताम हुआ और तबर्रुक तकसीम किया गया। जलसे में हाजी मोहम्मद शाहिद, हाजी मोहम्मद आमिर, हाजी मोहम्मद सलमान, हाजी मोहम्मद हारुन, तसव्वर शाहजहांआबाद, असद मोहम्मद, अकरम सहित बड़ी संख्या में नमाजी और अकीदतमंद मौजूद रहे।








