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खंदौली में बंदरों का कहर 150 से 200 के झुंड ने डॉक्टर समेत छह लोगों पर किया हमला

AGRA NEWS: खंदौली में बंदरों का कहर 150 से 200 के झुंड ने डॉक्टर समेत छह लोगों पर किया हमला, सांड ने पान विक्रेता को पटका..खंदौली कस्बे में आवारा जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को 150 से 200 बंदरों के झुंड ने चौपार क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया और डॉक्टर समेत छह लोगों पर हमला कर घायल कर दिया। वहीं, हाईवे पर एक सांड ने पान विक्रेता को कई बार पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया। लगातार हो रही इन घटनाओं से कस्बावासियों में भय का माहौल है और लोगों ने प्रशासन से तत्काल स्थायी समाधान की मांग उठाई है। बंदरों का झुंड बना आतंक खंदौली कस्बे के रोडवेज बस स्टैंड के समीप चौपार क्षेत्र में रविवार को बंदरों के झुंड ने ऐसा उत्पात मचाया कि पूरे मोहल्ले में दहशत फैल गई। लगभग 150 से 200 बंदरों के झुंड ने सुबह से शाम अलग-अलग समय पर चार बार हमला कर डॉक्टर सहित आधा दर्जन लोगों को घायल कर दिया। घटना के बाद लोगों ने घरों के दरवाजे बंद कर लिए और बच्चों को बाहर निकलना तक बंद कर दिया। हमले में ये लोग हुए घायल हमले में कस्बे के प्रसिद्ध फिजिशियन डॉ. सुरेश चंद्र अग्रवाल, मेडिकल स्टोर संचालक श्याम सुंदर सिंह, ओमा बुआ, छुटकू अग्रवाल समेत छह लोग घायल हो गए। सबसे गंभीर चोट डॉ. सुरेश चंद्र अग्रवाल के सिर में लगी, जबकि श्याम सुंदर सिंह, ओमा बुआ और छुटकू अग्रवाल की टांगों पर बंदरों ने काट लिया। घायलों के पैरों से खून बहता देख आसपास के लोग दौड़ पड़े और किसी तरह बंदरों को भगाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बंदरों के आक्रामक होने की वजह क्या स्थानीय लोगों का कहना है कि चौपार के समीप स्थित टीटीएसपी की पानी की टंकी में कई बंदरों की डूबने और घुटन से मौत हो चुकी है। इसके बाद से बंदर पहले की अपेक्षा अधिक आक्राम हो गए हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भोजन की कमी के कारण भी बंदर हिंसक व्यवहार कर रहे हैं। हाईवे पर सांड का हमला, पान विक्रेता गंभीर घायल दूसरी ओर, खंदौली हाईवे पर एक सांड ने पान विक्रेता पर हमला कर उसे कई बार पटका, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने किसी तरह उसे छुड़ाया और अस्पताल पहुंचाया। यह घटना उस समय हुई जब हाईवे पर यातायात सामान्य था और आसपास काफी भीड़ थी। पिछले 15 दिनों से हो रही हैं हमले की घटनाएं ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पंद्रह दिनों में बंदरों के हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक वन विभाग और प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने तथा स्थायी समाधान की मांग की है। आगरा में आवारा पशुओं का यह पहला मामला नहीं आगरा में सड़कों और बस्तियों में आवारा जानवरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय में एत्माउद्दौला क्षेत्र में आवारा सांडों ने एक व्यक्ति को अपनी चपेट में लेकर उसकी मौत के घाट उतार दिया था । गौशाला बनाने और जानवरों को पकड़ने के वादे होते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।