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कौशांबी में युवाओं को पशुपालन से रोजगार परख कार्यक्रम की दी गई जानकारी

KAUSHAMBI NEWS: कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी में आयोजित 5 दिवसीय पशुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। कार्यक्रम में युवाओं को डेयरी और बकरी पालन के माध्यम से रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से अपनाने और इसे लाभकारी व्यवसाय बनाने की सलाह दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशु प्रजाति, दाने – हरे चारे की, पशु टीका और बीमारियों से रोक थाम और योजनाओ के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को नेपियर घास, ऐज़ोल्ला, कटा चारा और पशु पोषण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। दुधारू पशुओं एवं बकरी पालन मे मिनरल मिक्स्चर पर विशेष जानकारी ओकमी पशुधन से पुष्पेंद्र ने जानकारी  दी। जिससे दूध उत्पादन और बढ़ता है। इसी क्रम में इंडियन इम्यूनो लॉजिकल से पवन सिंह ने पशु बीमारी, टीका और पालन प्रबंधन पर बात कही। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं को प्रतिदिन हरा चारा और 30–50 ग्राम पोषक तत्व देना जरूरी है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और प्रजनन क्षमता बेहतर होती है। बड़ती गर्मी को देखते हुए पशु वैज्ञानिक ने जल्दी दाने चारे व दुहने की, दोपहर में पशु को ठंडे पानी के सेवन, शेड पर फुआरा और पैरा को छत पर प्रयोग पर जोर दिया। केवीके की मुहिम “हर घर एक दुधारू पशु” के तहत बताया गया कि यदि हर परिवार एक दुधारू पशु रखे, जो साल में एक बार बच्चा दे और 6 माह तक दूध दे, तो पशुपालन को आसान और लाभकारी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि किसान, ग्रामीण युवा, स्वयं सहायता समूह (SHG) और डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। लोन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, फोटो, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और एक सरल प्रोजेक्ट रिपोर्ट की आवश्यकता होती है। जो विभिन्न योजनाओं जैसे राष्ट्रीय पशुधन मिशन, गोकुल मिशन और गौशाला योजना के बारे में जानकारी दी।  प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को बुकलेट, बैग और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित दिया गया। केंद् के डॉ अमित केशरी, डॉ प्रदीप डॉ शेष नाथ ने कार्यक्रम मे सहयोग किया।