सीएम पोर्टल समेत उच्चाधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग
SONBADHR NEWS (विवेक पाण्डेय) ओबरा तहसील के बिल्ली-मारकुंडी व खेबंधा गांव स्थित रेणु नदी में मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. के नाम आवंटित पत्थर और बालू खनन पट्टों में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। कंपनी के कथित पूर्व निदेशक पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। आरोप है कि यह फर्जीवाड़ा ज्येष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप की जानकारी में हो रहा है। जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या 40020026008487 और रजिस्ट्री के जरिए उच्चाधिकारियों को भेजे प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि ओबरा तहसील के ग्राम बिल्ली मारकुंडी स्थित आराजी संख्या 4478, रकबा 2.20 हेक्टेयर में डोलोस्टोन खनन के लिए मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. को 2 अगस्त 2022 से 1 अगस्त 2032 तक 10 वर्षीय पट्टा स्वीकृत हुआ था। इस पट्टे से जुड़े माइनिंग प्लान, पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण विभाग की सहमति, डीजीएमएस अनुमति और रजिस्ट्री डीड समेत सभी दस्तावेजों पर कंपनी की ओर से निदेशक के रूप में सचिन अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। आरोप है कि ऑनलाइन कंपनी रिकॉर्ड के अनुसार सचिन अग्रवाल ने 14 नवंबर 2022 को ही निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में कंपनी के निदेशक आकाश सिंघल व अनुभव सिंघल हैं। इसके बावजूद पिछले करीब चार वर्षों से खनन विभाग की मिलीभगत से सचिन अग्रवाल द्वारा निदेशक के रूप में पत्राचार और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाते रहे।
इसी तरह ग्राम खेबंधा स्थित आराजी संख्या 246 खंड-स, रकबा 7.00 हेक्टेयर में बालू खनन के लिए 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक स्वीकृत पट्टे पर भी सवाल उठे हैं। शिकायत में कहा गया है कि इस पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को हुई, जिसमें सचिन अग्रवाल ने निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि वे उससे पहले ही पद छोड़ चुके थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निदेशक पद पर न रहते हुए सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना गंभीर फर्जीवाड़ा है। इससे संबंधित रजिस्ट्री और उसके बाद किया गया खनन अवैध माना जाना चाहिए। मामले में मांग की गई है कि दोनों खनन पट्टों में तत्काल खनन व परिवहन पर रोक लगाई जाए, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो तथा कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।







