Home उत्तर प्रदेश अहरौरा हादसे पर जिला प्रशासन व खनन अधिकारी जिम्मेदार

अहरौरा हादसे पर जिला प्रशासन व खनन अधिकारी जिम्मेदार

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चंद्र पाण्डेय/अभय कुमार त्रिपाठी) जनपद के अहरौरा थाना क्षेत्र में लापरवाही से हुई भीषण त्रासदी ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया है। क्योंकि यहां आए दिन ब्लास्टिंग से मनुष्यों की जीवन लीला समाप्त हो रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जनता जवाब चाहती है कि उक्त घटना में जिला व पुलिस प्रशासन सहित खनन अधिकारी व अहरौरा थानेदार जवाबदेह क्यों नहीं हैं? सबसे पहले यह जान लेना आवश्यक है कि अहरौरा व अदलहाट जनपद के दो क्रीम वाले थाने हैं, जिन्हें बेचा अथवा नीलाम किया जाता है। क्रेशर संचालन व ब्लास्टिंग के लिए ठेकेदारों द्वारा अवैध खनन कराया जाता है। इसे देखने वाला मिर्जापुर में कोई नहीं है। अवैध ब्लास्टिंग से हो रही मौतों पर पंद्रह वर्ष पूर्व कांग्रेसी नेता बच्चा सिंह ने महीनों अनशन, प्रदर्शन व धरना दिया था। कुछ दिनों तक शासन के भय से अवैध ब्लास्टिंग रुक गई थी, किंतु उनके स्वर्ग सिधारते ही प्रशासन फिर बेलगाम हो गया। एक चर्चा के अनुसार, मिर्जापुर, सोनभद्र, शक्तीनगर आदि कई जनपदों में सेवारत व अवकाश प्राप्त कुछ खनन अधिकारियों का एक गैंग है जो हर जगह हावी है। ये भ्रष्ट अधिकारी अपने लोगों के नाम क्रेशर प्लांट का लाइसेंस लेकर खुद मजा ले रहे हैं। यदि यह कहा जाए कि “मिर्जापुर में मांस की गठरी की रखवाली कुत्तों के हवाले है” तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ब्लास्टिंग के लिए कई कड़े नियम व कानून बने हैं, लेकिन जिम्मेदार,निकम्मे व भ्रष्ट अधिकारी नियमों और कानूनों की धज्जियां उड़ाने में देर नहीं लगाते। ब्लास्टिंग रात में कराने का नियम है, लेकिन जब चाहे कराई जा रही है। ब्लास्टिंग कराने के पहले ब्लास्टिंग स्थल से चारों दिशा में पांच कि.मी. दूर तक मुनादी कराने का नियम है, पालन नहीं हो रहा। ब्लास्टिंग के लिए आने वाले विस्फोटकों की कोई जांच नहीं होती। विस्फोटकों को रखने के लिए बस्ती से दूर मैगजीन (बारूद रखने का घर) बनाई जाती है। क्या अहरौरा थानेदार को अथवा उनके आला अधिकारियों को पता है कि अहरौरा में वह मैगजीन कहां बनी है। पड़री थाना क्षेत्र में दर्जनों और लगभग उतने ही क्रेशर प्लांट मड़िहान थाना क्षेत्र में संचालित हैं। वहां भी मैगजीन होनी चाहिए। प्रशासन बताए कि उपरोक्त मैगजीनों की सुरक्षा किसके हवाले है। प्रशासन यह भी बताए कि जनपद में कुल कितने क्रेशर संचालकों के पास प्रतिमाह कितनी मात्रा में बारूद खरीदने का लाइसेंस है? महीने में ब्लास्टिंग के लिए आया बारूद कितना खर्च हुआ, कितना मैगजीन में स्टॉक बचा है, कितना क्रेशर वालों ने बारूद गलत हाथों में बेच दिया, इसकी जांच किस संस्था के जिम्मे है? क्रेशर प्लांट वाले खनन अधिकारी से मिलकर, जहां खनन का पट्टा प्राप्त किए हैं, वहां खनन नहीं कराते, क्योंकि वहां पत्थर ही नहीं है। इसलिए सरकार की आंखों में धूल झोंककर पट्टा क्षेत्र से बाहर जाकर अवैध ब्लास्टिंग कर रहे हैं। जनता ने मांग की हैं कि मीरजापुर खनन अधिकारी सहित प्रदेश के सभी भ्रष्ट खनन अधिकारीयों की यदि उनकी संपत्तियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जांच करा दे तो इन भ्रष्टों के पास कितनी चल व अचल अरबों व खरबों की संपत्ति पड़ी है। उसे सुनकर पूरा प्रदेश चौंक जाएंगे।