SAHARANPUR NEWS: हेलमेट हमारा सुरक्षा कवच ही नहीं यह हम हम सब जानते हैं फिर भी लोग हेलमेट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं कई लोग हेलमेट तो लेकर चलते हैं लेकिन उसे पहना नहीं है हेलमेट पहनने से आपकी शान काम नहीं होगी यह वक्त आने पर आपकी जान ही बचाएगा इसलिए दो पहिया दो पहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट का प्रयोग बहुत ही जरूरी है शहर एवं देहात की सड़कों पर कई लोग ऐसे नजर आते हैं जो घर से हेलमेट लेकर चलते हैं लेकिन उन्होंने उसे पहनना जरूरी नहीं समझा एक चालक तीन सवारी बैठा कर बाइक से जा रहा था हेलमेट को पहनने की जगह हाथ में लिए था एक बाइक सवार ने तो पीछे बैठे अपने साथियों को हेलमेट दे रखा था ऐसे लोगों का हेलमेट लेकर चलने का उद्देश्य सिर्फ चलन से बचाना है शायद वह भूल गए की चालान से ज्यादा कीमती जिंदगी है जिले भर में होने वाली बाइक सड़क दुर्घटनाओं में बाइक सवार अधिकांश लोगों की मौत सर में चोट लगने से होती है हादसों में स्वयं की रक्षा जागरूकता से ही हो सकती है लेकिन सड़कों पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले 95% से अधिक बाइक चालक सर पर हेलमेट नहीं लगाते इसी कारण सड़क दुर्घटनाओं में घातक परिणाम सामने आ रहे हैं गांव व शहरों की सड़कों से लेकर राजमार्ग तक की सड़कों पर लोग हेलमेट के बिना ही सफर करते हैं जबकि सभी को पता है कि हेलमेट लगाने से हादसों से जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ ही यातायात के नियमों का भी पालन होता है लेकिन लोग स्वयं की सुरक्षा के लिए भी लाप्रवाह ही बने हुए हैं सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौत 20 वर्ष से 44 वर्ष के युवाओं की ही होती है इसके बावजूद भी युवा हेलमेट लगाने को तैयार नहीं है कुछ समाजसेवियों एवं अधिकारियों से चर्चा की गई समाजसेवियों का कहना है कि जब भी बाइक सवार बाइक चलाए तो हेलमेट जरूर लगाए हेलमेट में सिर्फ बाइक सवार व्यक्ति की जान बचा सकता है बल्कि उसके परिवार को भी किसी तरह के दुख से बचाता है सड़कों पर बाइक चलाते समय हेलमेट से बेहतर कोई भी दूसरा सुरक्षा कवच नहीं है हेलमेट सभी को जरूर लगाना चाहिए वहीं थाना अध्यक्ष बड़गांव का कहना है कि हेलमेट के प्रति जागरूकता को लेकर एक अभियान शुरू किया जाएगा ग्रामीणों का कहना है की बाइक चालकों की मौत अधिकांश हादसों में सर में चोट लगने से होती है हेलमेट एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो किसी भी तरह के हादसों में बाइक सवार लोगों के सिर में चोट लगने से बचाता है हादसों में अगर हाथ पैर टूट जाए तो व्यक्ति ठीक हो जाता है लेकिन सर में चोट लगने से जिंदगी ही खत्म हो जाती है हेलमेट से बाइक सवार के साथ ही स्वम अपने परिवार को भी दुख से बचाया जा सकता है हेलमेट की असली अहमियत दुर्घटना के समय ही पता चलती है हेलमेट से बेहतर कोई दूसरा सूरक्षा कवच नहीं है एक शोध के अनुसार बिना हेलमेट के भारत में हर साल सड़क दुर्घटना में तीन फ़ीसदी का इजाफा हो रहा है दुर्घटनाओं में 78 फ़ीसदी लोग 20 से 44 वर्ष की आयु के होते हैं दो पहिया वाहनों के हादसे में सिर पर चोट लगने से ही अधिकांश मौत होती है सर की गंभीर चोटों से केवल हेलमेट ही बचा सकता है इसके बावजूद ज्यादातर लोग हेलमेट पहनना पसंद नहीं करते और दुर्घटना से बचाव को हेलमेट सबसे बेहतर सुरक्षा कवच है।







