Home आस्था हमें बंटना नहीं है, एकजुट होना है: स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती

हमें बंटना नहीं है, एकजुट होना है: स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती

हमें बंटना नहीं है, एकजुट होना है: स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती
हिंदुओं के धन का उपयोग हिंदुओं के लिए हो

PRAYAGRAJ NEWS: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के माघ मेला शिविर परेड में विराट संत सम्मेलन का आयोजन हुआ। दीप प्रज्वलन के उपरांत विजय महामंत्र का जाप हुआ। अखिल भारतीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने संत चरणों में समाज का मार्गदर्शन करने का निवेदन किया। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महराज ने कहा कि इस मंच पर सभी वैष्णो, शैव डंडी सभी मत पंथ संप्रदाय के लोगों की एकजुट दिख रही है जिससे यह स्पष्ट है कि इस संत सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज की एकता हिंदू समाज से कुरीतियों का समापन हिंदू समाज के समक्ष उत्पन्न चुनौतियां संस्कार, धर्मांतरण जैसे विषयो के लिए हिंदू समाज की एकजुटता अति आवश्यक है। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महराज ने कहा कि हमें बंटना नहीं है, हमें एकजुट होना है हमारी परंपराएं और संस्कृति गौरवशाली रही हैं हमें उनका आत्मसात करना होगा अपने ऊपर होने वाले आक्रमण का जवाब देना होगा हिंदू समाज अब अत्याचार नहीं सहेगा। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महराज ने आवाहन करते हुए कहा कि हिंदुओं के धन का उपयोग हिंदुओं के लिए हो हिंदू समाज की बहन, बेटियों के साथ अत्याचार ना हो और लोग लालच देकर उनका धर्मांतरण ना कराया जाए अन्यथा परिणाम भयावह होंगे। उन्होंने कहा कि समाज में विषमता दिखने लगेगी. इसके पूर्व केंद्रीय संत समिति के महामंत्री जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि आज मंदिरों के अधिग्रहण धर्मांतरण, लव जिहाद का हिंदू समाज की एक जुटता से मुकाबला हो सकता है,परिस्थितियों के अनुसार यह विश्व हिंदू परिषद का पारंपरिक संत सम्मेलन संतों के मार्गदर्शन में कार्य करने वाले संगठन के कार्यक्रम में कहना चाहूंगा कि पूरे देश का लाखों करोड़ का बजट होता है, 42 हजार करोड़ का नशीला पदार्थ पाया जाता है जहां 2011 की जनगणना में 12 पादरी थे आज 65,000 पादरी हैं बढ़ते हुए परिवार न्यायालय की संख्या भी हिंदू समाज में विघटन की स्थिति स्पष्ट कर रही है हमारे मंदिर हमारे धर्म स्थान हमारी संख्या सब कुछ संतों को चिंता करनी है,