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स्व शाकिर हुसैन तशना ने अपनी शायरी के जरिए एक अलग पहचान बनाई : एम ए हसीन

करेली के अदब घर में बज़्म अहबाब के तत्वाधान में मशहूर शायर शाकिर हुसैन तशना कानपुरी की याद में शेरी नशिस्त

PRAYAGRAJ NEWS: करेली स्थित अदब घर में बज़्म अहबाब के तत्वाधान में मशहूर शायर और वरिष्ट पत्रकार स्व शाकिर हुसैन तशना कानपुरी की याद में एक शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया ! जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एम ए हसीन ने की और मुख्य अतिथि के रूप में यूसुफ हबीब और विशिष्ट अतिथि में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की पूर्व अध्यक्ष विभाग अरबी व फारसी की सालेहा रशीद, मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष असरार नियाज़ी , तालीम घर के बानी अहसान उल्लाह अंसारी और अदब घर के बानी फरमूद इलाहाबादी उपस्थित रहें ! प्रोग्राम का संचालन इलाहाबाद हाईकोर्ट सीनियर एडवोकेट बख्तियार यूसुफ ने किया !सीनियर एडवोकेट एम ए हसीन ने कहा कि स्व मशहूर शायर शाकिर हुसैन तशना कानपुरी एक बेहतरीन शायर ही नहीं थे बल्कि वो एक वरिष्ट पत्रकार थें,उन्होंने ने शेरों शायरी में अपनी एक अलग पहचान बनाई और आज वो हमारे बीच नहीं लेकिन वो हमारे दिलों में ज़िंदा हैं ! मुख्य अतिथि यूसुफ हबीब ने कहा कि स्व शाकिर हुसैन तशना वरिष्ट पत्रकार थें और उन्होंने पत्रकारिता जगत में एक बड़े कलमकार के रूप में जाने जाते थे ! इन्होंने कहा कि तशना ने पत्रकारिता में बहुत जिम्मेदारी से काम किया है! डॉक्टर सालेहा रशीद ने कहा शाकिर हुसैन तशना मुझे बहन की तरह मानते थे और मैं भी उन्हें भाई की तरह मानती थी और जब भी कभी यूनीवर्सिटी में कोई कार्यक्रम होता था तो वो मेरे कहने पर तशरीफ़ लाते थे और अपनी कलम से हकीकत लिखा करते थे ! तालीम घर के बानी अहसान उल्लाह अंसारी ने कहा के तशना भाई से मेरे ताल्लुकात बहुत पुराने थे और आज भी उनकी कमी महसूस होती है ! हम लोग अक्सर तशना भाई के घर पर घंटों बैठा करते थे और चाय पीते पीते बाते हुआ करती थीं और आज मैं उनके बड़े बेटे अमजद हुसैन रावी और उनके भांजे सुहैल अख़्तर को मुबारकबाद देता हूं कि उन्होंने अपने वालिद की याद में ये प्रोग्राम ऑर्गेनाइज कराया ! फरमूद इलाहाबादी ने कहा के सबसे पहले मेरी मुलाकात तशना भाई से अफजल जायसी के घर पर हुई थी और फिर कहीं न कहीं शेरी नशिस्त में उनसे मुलाकात होती थी ! संचालन के दौरान एडवोकेट बख्तियार यूसुफ ने कहा कि मशहूर शायर स्व शाकिर हुसैन तशना के बहुत शागिर्द हैं शाम के वक्त लोग उनके घर पर बैठते थे और घंटों शेरों शायरी हुआ करती थी ! इस के बाद मुशायरा का दौर शुरू हुआ जिसमें अहम शायर एम ए हसीन, तलत महमूद, डॉक्टर राम लखन ,सुनील दानिश, शाहिद खान , वाकिफ अंसारी, बख्तियार यूसुफ,अत्या नूर , शिबली सना, खुर्शीद अख़्तर , प्रभात आधार, जीशान , सुहैल अख़्तर, अमजद हुसैन रावी आदि ने बेहतरीन ग़ज़ल पेश कर के वाह वाही बटोरी! उपस्थित लोगों में असरार गांधी , आसिफ उस्मानी, महमूद खान, वजीर खान, असद कुरैशी, अशद हुसैन ताबी आदि मौजूद रहें !
आखिर में बज़्म अहबाब के अध्यक्ष और प्रोग्राम के कनवीनर अमजद हुसैन रावी, सुहैल अख़्तर और साकिब सिद्दीकी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।